अंबिकापुर। सरकारी नौकरी के दौरान आय से कहीं ज्यादा संपत्ति जुटाने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अंबिकापुर कलेक्ट्रेट में क्लर्क रहे ऋषि सिंह को विशेष सत्र न्यायालय ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराते हुए 4 साल के कारावास की सजा सुनाई है। मामले की जांच में उनकी ज्ञात आय और सामने आई संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर पाया गया था। करीब 13 साल पहले शुरू हुई ACB की कार्रवाई के बाद अब अदालत के फैसले ने इस मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।

2013 में घर पर पहुंची थी ACB की टीम
मामले की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), रायपुर को ऋषि सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी। जांच आगे बढ़ने के बाद 18 जून 2013 को ACB की टीम ने केदारपुर स्थित उनके मकान पर छापा मारा। छापे के दौरान जांच एजेंसी को घर से बड़ी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज मिले। इसके अलावा जांच में उनके नाम से जुड़ी कई अचल संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई।

जांच में सामने आया संपत्ति का चौंकाने वाला अंतर
ACB ने उनकी नौकरी से प्राप्त वैध आय और उनके पास मौजूद संपत्तियों का मिलान किया। जांच एजेंसी के अनुसार, ऋषि सिंह की संपत्ति उनकी ज्ञात आय से 1049 गुना अधिक पाई गई। यही आंकड़ा इस मामले का सबसे अहम पहलू बना। अभियोजन के मुताबिक, पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान इतनी बड़ी संपत्ति के स्रोत को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया।

पांच साल बाद कोर्ट में दाखिल हुई चार्जशीट
लंबी जांच के बाद ACB ने वर्ष 2018 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित विशेष अदालत में अभियोग पत्र पेश किया। इसके बाद मामले में साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ी। मामले में बरामद नकदी, आभूषण, संपत्तियों के दस्तावेज और आय से जुड़े रिकॉर्ड को अभियोजन की ओर से अहम साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया।

अब अदालत ने सुनाया फैसला
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद विशेष सत्र न्यायालय ने ऋषि सिंह को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी माना और 4 वर्ष की सजा सुनाई। अदालत ने उनकी जमानत भी खारिज कर दी है।

13 साल पुरानी कार्रवाई का अब आया नतीजा
2013 में जिस कार्रवाई के साथ यह मामला शुरू हुआ था, उसका न्यायिक परिणाम अब सामने आया है। इस फैसले को सरकारी पद पर रहते हुए कथित तौर पर अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने के मामलों में जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। किसी सरकारी कर्मचारी की संपत्ति उसकी घोषित और वैध आय से कितनी मेल खाती है, यह सवाल ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों और अदालतों के लिए सबसे अहम होता है। अंबिकापुर का यह मामला इसी जांच प्रक्रिया और उसके लंबे कानूनी सफर की मिसाल बनकर सामने आया है।