बिलासपुर : भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) पर लगाए गए 5 अरब 4 करोड़ 70 लाख रुपए से अधिक के टैक्स और जुर्माने को लेकर चल रहा विवाद अब आपसी सहमति से सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ेगा। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) और छत्तीसगढ़ शासन के बीच चल रहे इस विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने की पहल की है। जस्टिस एन के व्यास की सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों की सहमति पर सीनियर एडवोकेट विवेक रंजन तिवारी को मध्यस्थ नियुक्त किया है। कोर्ट ने मामले के अंतिम निराकरण तक पूर्व में जारी अंतरिम आदेश को भी प्रभावी रखा है।

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से मामलों को हाई कोर्ट के मध्यस्थता केंद्र भेजने का अनुरोध किया गया था। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि सभी संबंधित मामले 8 अक्टूबर 2026 को मध्यस्थता केंद्र में सूचीबद्ध किए जाएं। मध्यस्थ दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने के लिए कम से कम तीन से चार अवसर देंगे। इसके बाद मध्यस्थता की प्रगति रिपोर्ट के साथ मामला 19 नवंबर 2026 को हाई कोर्ट में पेश किया जाएगा।

पांच गुना पेनाल्टी के साथ जारी हुआ था 5 अरब का नोटिस

यह पूरा विवाद साल 2019 में शुरू हुआ था, जब नगर निगम भिलाई के तत्कालीन आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी ने बीएसपी प्रबंधन को नोटिस जारी किया था। निगम का आरोप था कि स्टील प्लांट प्रबंधन अपनी संपत्तियों की पूरी जानकारी नहीं दे रहा है, जिससे निगम को निर्धारित टैक्स से कम राशि मिल रही है। नगर निगम ने सर्वे के बाद बीएसपी पर पांच गुना पेनाल्टी लगाते हुए 5 अरब 4 करोड़ 70 लाख 74 हजार 445 रुपए जमा करने का डिमांड नोटिस जारी किया था। नोटिस में टैक्स जमा नहीं करने पर कुर्की की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।

टैक्स जमा नहीं किया, कुर्की वारंट जारी

निगम के नोटिस के बावजूद बीएसपी प्रबंधन ने टैक्स जमा नहीं किया। इसके बाद नगर निगम ने कुर्की की कार्रवाई के लिए वारंट जारी कर दिया। निगम की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बीएसपी प्रबंधन ने निगम के डिमांड नोटिस और कुर्की की कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका दायर की। इसी विवाद से जुड़े मामलों में अब हाई कोर्ट ने मध्यस्थता के जरिए समाधान तलाशने का रास्ता अपनाया है।

नवंबर में पेश होगी मध्यस्थता की रिपोर्ट

हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार, 8 अक्टूबर को मध्यस्थता केंद्र में पक्षकारों के बीच बातचीत शुरू होगी। मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों को विवाद के समाधान के लिए तीन से चार अवसर दिए जाएंगे। इसके बाद 19 नवंबर को हाई कोर्ट में रिपोर्ट पेश की जाएगी। तब तक पहले से जारी अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट पिंकी आनंद वर्चुअल माध्यम से जुड़ीं, जबकि पवन अग्रवाल और विक्रम शर्मा उपस्थित रहे। राज्य शासन की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल गैरी मुखोपाध्याय ने पैरवी की। वहीं अन्य पक्षों की ओर से सीनियर एडवोकेट फौजिया मिर्जा, अली अफजाल मिर्जा और पंकज अग्रवाल उपस्थित रहे।