बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीम ने दो अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में पैंगोलिन के 9.260 किलोग्राम शल्क और तेंदुए की एक खाल बरामद की गई है। मामले में वन विभाग ने कुल छह आरोपियों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों और तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

वन विभाग की इस कार्रवाई को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर विभाग ने अलग-अलग इलाकों में दबिश देकर वन्यजीवों के अंगों की तस्करी में शामिल लोगों तक पहुंच बनाई है।

रेड्डी गांव में पहली कार्रवाई, पैंगोलिन के शल्क बरामद

मिली जानकारी के अनुसार, वन विभाग को वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनके अंगों की तस्करी से जुड़ी गतिविधियों की सूचना मिली थी। इसके बाद विभाग की टीम ने जांच और निगरानी शुरू की। इसी कड़ी में पहली कार्रवाई बीजापुर जिले के ग्राम रेड्डी, तहसील गंगालूर में की गई।

यहां वन विभाग की टीम ने दबिश देकर पैंगोलिन के 9.260 किलोग्राम शल्क बरामद किए। मौके से चार आरोपियों को हिरासत में लिया गया। बरामद शल्कों को जब्त कर विभाग ने आरोपियों से पूछताछ शुरू की। अधिकारियों को आशंका है कि पैंगोलिन के शल्कों की बरामदगी किसी बड़े अवैध कारोबार से जुड़ी हो सकती है।

पूछताछ में मिले सुराग, मल्लेपल्ली में दूसरी दबिश

रेड्डी गांव में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान वन विभाग की टीम को कुछ अहम सुराग मिले। इन जानकारियों के आधार पर अधिकारियों ने बासागुड़ा क्षेत्र के ग्राम मल्लेपल्ली में दूसरी कार्रवाई की।

यहां छापेमारी के दौरान टीम ने तेंदुए की एक खाल बरामद की। इस मामले में दो अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया गया। इस तरह दोनों स्थानों पर की गई कार्रवाई में कुल छह आरोपी वन विभाग की पकड़ में आए हैं।

वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि पैंगोलिन के शल्क और तेंदुए की खाल कहां से लाई गई थी और इन्हें किसे बेचा जाना था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस अवैध कारोबार में स्थानीय शिकारियों के अलावा दूसरे जिलों या राज्यों के तस्कर भी शामिल हैं या नहीं।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत होगी कड़ी कार्रवाई

गौरतलब है कि पैंगोलिन और तेंदुआ दोनों ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल अति संरक्षित वन्यजीव हैं। इनका शिकार करना, इनके अंगों का संग्रह करना, खरीद-बिक्री करना और तस्करी करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

पैंगोलिन का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध शिकार और शल्कों की तस्करी वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। वहीं, तेंदुए की खाल का अवैध कारोबार भी वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा है।

वन विभाग ने सभी आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच के दौरान तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। फिलहाल विभाग का ध्यान इस नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचने और वन्यजीवों के अवैध शिकार पर रोक लगाने पर है।