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कोलकाता: पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कार्यवाहक मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने परिणामों पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा कि उनकी पार्टी चुनाव हारी नहीं, बल्कि “हराई गई” है। उन्होंने इस्तीफे की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि वह पद छोड़ने नहीं जा रहीं और नैतिक रूप से खुद को विजेता मानती हैं।
ममता बनर्जी ने Election Commission of India पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल विपक्ष के खिलाफ किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान अधिकारियों के तबादले और छापेमारी ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया।
उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि मतदान के बाद मशीनों में असामान्य रूप से उच्च चार्ज स्तर होना संदेह पैदा करता है। ममता ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने पूरी ताकत से चुनाव लड़ा, लेकिन “सिस्टम” उनके खिलाफ काम करता दिखा। उनके अनुसार, यह अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण चुनाव अनुभव रहा।
राजनीतिक मोर्चे पर ममता ने विपक्षी एकजुटता पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि Rahul Gandhi, Arvind Kejriwal और Akhilesh Yadav समेत कई नेताओं ने उनसे संपर्क कर समर्थन जताया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विपक्षी गठबंधन को और मजबूत किया जाएगा।
ममता बनर्जी ने खुद को “आम नागरिक” बताते हुए कहा कि अब वह बिना किसी पद के भी जनता की आवाज उठाती रहेंगी। उनका कहना है कि उनका राजनीतिक संघर्ष जारी रहेगा और वह लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे भी लड़ाई लड़ेंगी। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नया मोड़ आने के संकेत मिल रहे हैं।