
चाय और कॉफी भारत में रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। सुबह की शुरुआत हो या काम के बीच थकान दूर करनी हो, ज्यादातर लोग गर्म चाय या कॉफी पीना पसंद करते हैं। लेकिन अगर आपको बेहद गर्म चाय या कॉफी पीने की आदत है, तो इसे लेकर थोड़ी सावधानी बरतना जरूरी है। कुछ शोधों में बहुत गर्म पेय पदार्थों और भोजन की नली (Esophagus) के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। इसका कारण अत्यधिक गर्म पेय से भोजन नली की अंदरूनी परत को बार-बार होने वाली गर्मी की चोट माना जाता है।
कितनी गर्म चाय-कॉफी से बचना चाहिए?
चाय या कॉफी तैयार करते समय उसका तापमान काफी अधिक हो सकता है। कप में डालने के बाद भी पेय लंबे समय तक बहुत गर्म रह सकता है। कुछ शोधों में करीब 65 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले पेय को लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई है। हालांकि, किसी एक तापमान को हर व्यक्ति के लिए कैंसर की निश्चित सीमा मानना सही नहीं होगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि चाय या कॉफी को कुछ देर ठंडा होने दें और तभी पिएं, जब वह आराम से पीने लायक तापमान पर आ जाए। केवल गर्म चाय या कॉफी पीने से कैंसर होना तय नहीं है, लेकिन लंबे समय तक बेहद गर्म पेय पीने की आदत जोखिम को प्रभावित कर सकती है।
बड़ी स्टडी में सामने आया गर्म पेय का कनेक्शन
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े शोध में बड़ी संख्या में लोगों के स्वास्थ्य और पेय पदार्थों के सेवन से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने गर्म पेय पदार्थों के सेवन और इसोफेजियल कैंसर के जोखिम के बीच संबंध पर गौर किया। ऐसे शोधों से यह संकेत मिलता है कि बहुत अधिक तापमान वाले पेय पदार्थ भोजन नली को नुकसान पहुंचा सकते हैं और लंबे समय में कैंसर के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, इस तरह की स्टडी किसी व्यक्ति के लिए यह साबित नहीं करती कि गर्म चाय या कॉफी पीने से सीधे कैंसर होगा। कैंसर के जोखिम में उम्र, तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा, खानपान और अन्य कई कारक भी भूमिका निभाते हैं।
दूसरी रिसर्च में लोगों को कितना गर्म लगा पेय?
एक अन्य अध्ययन में वयस्कों को अलग-अलग तापमान पर ब्लैक कॉफी पीने के लिए दी गई। अध्ययन में पाया गया कि ज्यादातर प्रतिभागियों को करीब 70 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान वाली कॉफी बहुत गर्म लगी। इससे यह संकेत मिलता है कि लोग अपनी सुविधा के अनुसार भी यह पहचान सकते हैं कि पेय पीने के लिए कितना गर्म है। इसलिए चाय या कॉफी को तुरंत गर्म-गर्म पीने के बजाय कुछ समय इंतजार करना बेहतर विकल्प हो सकता है। खासतौर पर अगर पेय पीते समय जीभ या मुंह में जलन महसूस हो रही हो, तो उसे और ठंडा होने देना चाहिए।
बहुत गर्म पेय भोजन नली को कैसे प्रभावित कर सकता है?
भोजन की नली यानी इसोफेगस हमारे मुंह से पेट तक भोजन पहुंचाने का काम करती है। बेहद गर्म पेय बार-बार पीने से इसकी अंदरूनी परत को गर्मी से चोट पहुंच सकती है। अगर लंबे समय तक ऐसी आदत बनी रहती है, तो इससे होने वाली बार-बार की जलन और क्षति कैंसर के जोखिम से जुड़ी हो सकती है। कुछ अन्य अध्ययनों में भी बहुत गर्म पेय पदार्थों और इसोफेजियल कैंसर के बीच संबंध की ओर संकेत किया गया है। हालांकि, इस संबंध को समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
कितने तापमान पर पीना बेहतर है?
गर्म पेय को किसी तय तापमान पर ही पीना जरूरी नहीं है। आसान नियम यह है कि चाय या कॉफी को तब तक ठंडा होने दें, जब तक वह आराम से पीने लायक न हो और मुंह या गले में जलन महसूस न हो। इसके अलावा तंबाकू और शराब से दूरी, संतुलित खानपान, स्वस्थ वजन और नियमित शारीरिक गतिविधि जैसी आदतें भी कैंसर के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अगर लंबे समय से निगलने में परेशानी, लगातार सीने में जलन, अपच, सीने या गले में दर्द या बिना वजह वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।