
रायपुर/बस्तर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को खतरे में डालने वाली एक बेहद खौफनाक अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश किया है। विदेशी फंडिंग के जरिए छत्तीसगढ़ में रचे जा रहे एक बड़े खेल पर ED ने करारी चोट की है। लेकिन इस पूरी बड़ी कार्रवाई ने छत्तीसगढ़ की खुफिया एजेंसियों (State Intelligence) की भारी नाकामी की पोल खोल कर रख दी है। धमतरी और बस्तर जैसे अति-संवेदनशील इलाकों में महीनों से विदेशी पैसों का खेल बेखौफ चल रहा था, और राज्य की पुलिस व खुफिया तंत्र बेखबर सोते रहे। केंद्रीय एजेंसी ED ने 18-19 अप्रैल को 6 राज्यों के 6 ठिकानों पर 8 से 10 घंटे की मैराथन छापेमारी कर इस बड़े नेक्सस को ध्वस्त किया है।
स्टेट इंटेलिजेंस फेल: राज्य पुलिस के नाक के नीचे करोड़ों का खेल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल छत्तीसगढ़ की इंटेलिजेंस विंग पर उठ रहा है। महीनों से विदेशी बैंक के कार्ड के जरिए छत्तीसगढ़ के अलग-अलग एटीएम से करोड़ों रुपए निकाले जा रहे थे। यह अवैध पैसा बस्तर और धमतरी के अंदरूनी इलाकों तक आसानी से पहुंच रहा था। इतनी बड़ी वित्तीय और संदिग्ध हलचल के बावजूद लोकल इंटेलिजेंस (LI) और राज्य का खुफिया तंत्र पूरी तरह से फेल साबित हुए। जब तक केंद्रीय एजेंसी ED ने मोर्चा नहीं संभाला, राज्य तंत्र को इस खतरनाक अंतरराष्ट्रीय साजिश की भनक तक नहीं लगी।
95 करोड़ का 'एटीएम' खेल और विदेशी बैंक ट्रुइस्ट
ED की जांच में सबसे चौंकाने वाला सच सामने आया है। साजिशकर्ताओं ने भारतीय बैंकिंग और रेगुलेटरी सिस्टम से बचने के लिए अमेरिकी बैंक ट्रुइस्ट’ (Truist) के डेबिट कार्ड्स का इस्तेमाल किया। आंकड़े बताते हैं कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच—महज 6 महीनों में—इन विदेशी कार्डों के जरिए 95 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि भारत लाई गई। इन कार्डों से नकदी निकालकर द टिमोथी इनिशिएटिव' (TTI) नामक संगठन को दी जा रही थी। यह संगठन भारत में FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के तहत पंजीकृत नहीं है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग और देशद्रोह की श्रेणी में आता है।
ED की छापेमारी में क्या-क्या मिला?
केंद्रीय एजेंसी की इस स्ट्राइक में कई अहम सुराग और संपत्तियां जब्त की गई हैं:
- 25 विदेशी (इंटरनेशनल) डेबिट कार्ड
- 40 लाख रुपए की नकद (Cash) राशि
- भारी मात्रा में डिजिटल डिवाइस (लैपटॉप, हार्ड ड्राइव) और संदिग्ध वित्तीय दस्तावेज।
बेंगलुरु एयरपोर्ट से खुला बस्तर का राज
विदेशी फंडिंग का यह खौफनाक जिन्न तब बोतल से बाहर आया, जब कुछ दिन पहले बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन ब्यूरो ने **मीका मार्क** नामक एक विदेशी नागरिक को धर दबोचा। सघन तलाशी में उसके पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड मिले। मीका से पूछताछ में मिले इनपुट्स के आधार पर ही ED ने धमतरी और बस्तर तक अपना जाल बिछाया।
नक्सल फंडिंग और धर्मांतरण: जांच के रडार पर बड़ी साजिश
ED के रडार पर सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी खौफनाक नीयत भी है। जांच के दो सबसे बड़े एंगल हैं:
नक्सल कनेक्शन: क्या राज्य की खुफिया तंत्र की विफलता का फायदा उठाकर यह पैसा घने जंगलों में नक्सलियों को हथियार मुहैया कराने और उनकी ताकत बढ़ाने के लिए भेजा जा रहा था?
धर्मांतरण: ED को जांच में एक स्पष्ट पैटर्न मिला है। जिन इलाकों के एटीएम से इन विदेशी कार्डों के जरिए सबसे ज्यादा पैसे निकाले गए हैं, ठीक उन्हीं इलाकों से हाल ही में धर्मांतरण की भारी शिकायतें भी मिली हैं। यह जांच की जा रही है कि क्या भोले-भाले आदिवासियों को लालच देकर धर्मांतरण कराने में इस विदेशी फंड का इस्तेमाल हुआ।
NGO पर कसता शिकंजा: 84 बैन, 153 अब भी रडार पर
छत्तीसगढ़ में NGO के नाम पर विदेशी फंडिंग का खेल बहुत गहरा है:
राज्य में पहले 364 से अधिक NGO को विदेश से मोटा फंड मिलता था।
जांच की आंच आते ही कई संस्थाएं रातों-रात बंद हो गईं। अब तक 84 NGO पर पूर्ण प्रतिबंध (Ban) लगाया जा चुका है।
विदेशी फंडिंग की हेराफेरी में साल 2024 में 12 और साल 2025 में 4 नए केस दर्ज हुए हैं।
वर्तमान में राज्य में 153 NGO बेहद सक्रिय हैं, जिनकी कुंडली अब ED नए सिरे से खंगाल रही है।