
भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। डॉ. मोहन यादव सरकार में नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का 'जाति प्रमाण पत्र' विवाद अब तूल पकड़ चुका है। यह मामला सीधे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की चौखट से होता हुआ अब 'हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी' (उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति) के पास पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कमेटी को 60 दिन के भीतर जांच कर फाइनल फैसला सुनाने का अल्टीमेटम दिया है। अदालत के इस आदेश के बाद सत्ता के गलियारों में हड़कंप मच गया है, वहीं विपक्ष में बैठी कांग्रेस को सरकार को घेरने के लिए एक बड़ा सियासी हथियार मिल गया है।
कांग्रेस ने खोला मोर्चा, भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस
इस पूरे विवाद की सियासी आंच को तेज करते हुए मध्यप्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति (SC) विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय (PCC) में एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अहिरवार ने ही मंत्री बागरी के जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने मीडिया को बताया कि न्यायपालिका ने उनके द्वारा 31 मार्च 2025 को दिए गए आवेदन को गंभीरता से लिया है और अब राज्यमंत्री को अपनी सच्चाई साबित करनी होगी।
क्या है मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का सख्त निर्देश?
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई करते हुए सीधे पुलिस या एजेंसी को जांच के आदेश देने के बजाय एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने को कहा है। कोर्ट के प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं:
स्क्रूटनी कमेटी करेगी जांच: याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार की शिकायत के आधार पर हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी पूरे मामले की बिंदुवार और निष्पक्ष सुनवाई करेगी।
60 दिन का अल्टीमेटम: अदालत ने साफ कर दिया है कि मामले को लटकाया नहीं जा सकता। कमेटी को 60 दिन (दो महीने) के भीतर प्रमाण पत्र की वैधता पर अपना अंतिम निर्णय लेना होगा।
मंत्री को मिलेगा बचाव का मौका: कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत संबंधित पक्ष (प्रतिवादी क्रमांक-3 यानी मंत्री प्रतिमा बागरी) को अपना पक्ष रखने और बचाव का पूरा अवसर दिया जाएगा।
सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए शासकीय अधिवक्ता ने हाईकोर्ट को आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि सक्षम प्राधिकारी (हाई लेवल कमेटी) पूरी तरह से नियमों के तहत काम करेगी। यदि पहले इस शिकायत पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है, तो अब तय समय-सीमा में जांच कर फैसला लिया जाएगा और इसकी आधिकारिक सूचना याचिकाकर्ता को भी दी जाएगी।
सियासी मायने: नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी विंध्य क्षेत्र का एक उभरता हुआ दलित चेहरा हैं। ऐसे में अगर हाई लेवल कमेटी की जांच में उनका जाति प्रमाण पत्र किसी भी स्तर पर त्रुटिपूर्ण या अवैध पाया जाता है, तो न सिर्फ उन्हें मंत्री पद से हाथ धोना पड़ सकता है, बल्कि उनकी विधायकी पर भी तलवार लटक सकती है। फिलहाल, अगले 60 दिन मध्यप्रदेश की सियासत के लिए बेहद दिलचस्प और उथल-पुथल वाले साबित होने वाले हैं।