
रायपुर/बस्तर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश के खिलाफ रची जा रही एक बेहद खतरनाक और हाई-टेक वित्तीय साजिश का पर्दाफाश किया है। विदेशी फंडिंग के जरिए भारत की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने के एक बड़े मामले में ED ने छत्तीसगढ़ के धमतरी और बस्तर सहित देश के 6 राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी की है। 18 और 19 अप्रैल को 6 अलग-अलग ठिकानों पर की गई इस 8 से 10 घंटे लंबी मैराथन तलाशी में कई चौंकाने वाले सबूत हाथ लगे हैं, जो सीधे तौर पर विदेशी बैंकों के जरिए भारत में अवैध धन खपाने की ओर इशारा करते हैं।
ED की रेड में क्या-क्या मिला?
जांच एजेंसी की इस बड़ी कार्रवाई में विदेशी फंडिंग के नेटवर्क की कमर टूट गई है। छापेमारी के दौरान टीम ने:
- 25 विदेशी (इंटरनेशनल) डेबिट कार्ड जब्त किए हैं।
- 40 लाख रुपए की नकद (Cash) राशि बरामद की है।
- भारी मात्रा में डिजिटल डिवाइस और बेहद अहम वित्तीय दस्तावेज सील किए गए हैं।
95 करोड़ का खेल और अमेरिकी बैंक 'ट्रुइस्ट'
ED की जांच में सबसे हैरान करने वाला खुलासा यह है कि विदेशी ताकतों द्वारा भारतीय बैंकिंग और रेगुलेटरी सिस्टम को चकमा देने के लिए अमेरिकी बैंक **‘ट्रुइस्ट’ (Truist)** के डेबिट कार्ड्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था। आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच—यानी महज 6 महीनों के भीतर—इन विदेशी कार्डों के जरिए करीब **95 करोड़ रुपए** की भारी-भरकम राशि भारत लाई गई। इन कार्डों के जरिए अलग-अलग राज्यों के एटीएम (ATM) से चुपचाप नकदी निकाली जा रही थी और उसे संदिग्ध कामों में बांटा जा रहा था।
यह पूरा पैसा द टिमोथी इनिशिएटिव' (TTI) नामक संगठन के उपयोग में लाया जा रहा था। सबसे गंभीर बात यह है कि यह संगठन भारत में FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) के तहत पंजीकृत ही नहीं है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी फंडिंग का मामला है।
बेंगलुरु एयरपोर्ट पर ऐसे फूटा भांडा
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के तार तब उलझने शुरू हुए जब कुछ दिन पहले बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन ब्यूरो ने **मीका मार्क** नामक एक विदेशी नागरिक को धर दबोचा। जब मीका की सघन तलाशी ली गई, तो उसके पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद हुए। उससे हुई कड़ी पूछताछ और इनपुट्स के आधार पर ही ED ने यह देशव्यापी रेड प्लान की, जिसके तार सीधे छत्तीसगढ़ से जुड़ गए।
नक्सल फंडिंग और धर्मांतरण रडार पर
छत्तीसगढ़ के लिहाज से यह मामला इसलिए बेहद संवेदनशील है क्योंकि ED विशेष रूप से बस्तर और धमतरी में हुई पैसों की निकासी की जांच कर रही है। जांच के दो सबसे बड़े बिंदु हैं:
नक्सल कनेक्शन: क्या यह बेहिसाब पैसा घने जंगलों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को मजबूत करने और हथियार खरीदने के लिए भेजा जा रहा था?
धर्मांतरण का खेल: प्रारंभिक जांच में धर्मांतरण का एक बड़ा एंगल सामने आया है। ED की जांच में यह पैटर्न मिला है कि जिन सुदूर इलाकों के एटीएम से इन विदेशी कार्डों के जरिए सबसे ज्यादा पैसे निकाले गए हैं, ठीक उन्हीं इलाकों से हाल के दिनों में धर्मांतरण की सबसे अधिक शिकायतें भी आई हैं।
84 NGO पर लग चुका है बैन, 153 अब भी रडार पर
विदेशी फंडिंग की आड़ में खेल कर रहे गैर-सरकारी संगठनों (NGO) पर भी शिकंजा कस दिया गया है।
राज्य में पहले 364 से अधिक NGO को विदेश से मोटा फंड मिलता था।
जांच शुरू होने के बाद कई संस्थाएं रातों-रात बंद हो गईं। अब तक 84 NGO पर पूरी तरह से प्रतिबंध (Ban) लगाया जा चुका है, जो बिना FCRA रजिस्ट्रेशन के विदेशी फंड ले रहे थे।
विदेशी फंडिंग की हेराफेरी में साल 2024 में 12 और साल 2025 में 4 नए केस दर्ज किए जा चुके हैं।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 153 NGO बेहद सक्रिय हैं जिनकी कुंडली अब ED नए सिरे से खंगाल रही है।
इस बड़ी कार्रवाई ने चैरिटी का चोला ओढ़कर विदेशी एजेंडा चलाने वाले संगठनों में हड़कंप मचा दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाली गिरफ्तारियां तय मानी जा रही हैं।