
बीजापुर। बस्तर के बीजापुर जिले के कोप्पगुड़ा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) कैंप की स्थापना को एक साल पूरा हो गया है। इस मौके पर कैंप परिसर में धार्मिक अनुष्ठान, पौधरोपण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। नवनिर्मित मंदिर में माता रानी की प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा की गई, वहीं जवानों के लिए बनाए गए बैरकों का भी लोकार्पण हुआ। शाम को आयोजित कार्यक्रम में जवानों के साथ अधिकारी भी लोकगीतों की धुन पर थिरकते नजर आए।
मंदिर में प्राणप्रतिष्ठा, बैरकों का लोकार्पण
कैंप की पहली वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में CRPF के डीआईजी बीएस नेगी और बीजापुर एसपी उमेश गुप्ता मौजूद रहे। इस दौरान परिसर में पौधरोपण भी किया गया। कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिसमें जवानों और अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कैंप में आयोजित यह कार्यक्रम सुरक्षा बलों के लिए पिछले एक साल के अनुभवों को साझा करने और आपसी मेलजोल का अवसर भी बना।
सुरक्षा के साथ बुनियादी सुविधाओं पर जोर
कोप्पगुड़ा कैंप पीडिया क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। स्थानीय स्तर पर सड़क, बिजली, पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच को लेकर बदलाव की बात कही जा रही है। प्रशासन और सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बीच क्षेत्र में विकास कार्यों तथा ग्रामीणों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
बताया गया कि लंबे समय से बंद कुछ स्कूल फिर से खुलने लगे हैं और बच्चों को स्कूलों में मध्याह्न भोजन भी मिलने लगा है। स्थानीय ग्रामीणों के कैंप तक इलाज के लिए पहुंचने को भी सुरक्षा बलों और समुदाय के बीच बढ़ते संपर्क के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, पूरे क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों की स्थिति और विकास कार्यों की प्रगति का आकलन आधिकारिक आंकड़ों तथा स्थानीय स्तर की जानकारी के आधार पर किया जाना जरूरी है।
गंगालूर-पीडिया क्षेत्र का रहा संवेदनशील इतिहास
गंगालूर और पीडिया क्षेत्र लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों के कारण संवेदनशील माना जाता रहा है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, नक्सली संगठन ने इस इलाके का इस्तेमाल अपने ठिकाने और नए सदस्यों को प्रशिक्षण देने के लिए किया था। इसी वजह से यहां सुरक्षा अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण रहा। क्षेत्र में अभियान शुरू करने से पहले सुरक्षा बलों को विस्तृत रणनीति बनानी पड़ती थी। ऐसे इलाके में कैंप की स्थापना को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।
MI-17 हेलीकॉप्टर पर हमले की घटना भी रही चर्चा में
इस क्षेत्र का नाम वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव के दौरान एक गंभीर घटना से भी जुड़ा रहा है। उस समय मतदान दल को लेकर उड़ान भर रहे MI-17 हेलीकॉप्टर को नक्सलियों ने निशाना बनाया था। इस घटना में फ्लाइट इंजीनियर मुस्तफा अली की जान चली गई थी। बताया जाता है कि हमले के पीछे हेलीकॉप्टर के ईंधन टैंक को निशाना बनाने की योजना थी। इस घटना ने बस्तर के दुर्गम इलाकों में चुनावी प्रक्रिया और सुरक्षा बलों के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर किया था।
CRPF 199 बटालियन की तैनाती के बाद बदली परिस्थितियां
CRPF की 199 बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर आनंद कुमार मल्लिक ने कैंप की स्थापना से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि भारी बारिश के बीच कैंप स्थापित किया गया था और शुरुआत में वहां बुनियादी व्यवस्थाएं भी चुनौतीपूर्ण थीं। इलाके में भय और अविश्वास का माहौल होने के बावजूद जवानों ने धीरे-धीरे कैंप की व्यवस्थाएं विकसित कीं। कार्यक्रम में कंपनी कमांडर त्रिलोचन प्रसाद, इंस्पेक्टर मनोज कुमार, एएसआई अवधेश साहनी और अन्य जवान मौजूद रहे। कोप्पगुड़ा कैंप की पहली वर्षगांठ सुरक्षा बलों के लिए एक अहम पड़ाव रही। अब क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था के साथ बुनियादी सुविधाओं और ग्रामीणों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच कितनी प्रभावी होती है, यह आगे की प्रगति से स्पष्ट होगा।