बिलासपुर शहर के पेट्रोल पंपों पर आम लोगों को मिलने वाली मुफ्त हवा, पानी और टॉयलेट की सुविधाएं अब बस कागजों तक ही सिमट कर रह गई हैं। शासन और तेल कंपनियों का पक्का नियम है कि हर पेट्रोल पंप पर ग्राहकों के लिए मुफ्त हवा, साफ टॉयलेट और पीने के पानी का इंतजाम होना ही चाहिए। लेकिन शहर के ज्यादातर पेट्रोल पंप इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। इसका नुकसान हर दिन सफर करने वाले हजारों वाहन चालकों और आम लोगों को उठाना पड़ रहा है।

नागरिकों की लगातार आ रही शिकायतों के बाद जब इन पेट्रोल पंपों की पड़ताल की गई, तो असलियत सामने आई। शहर के कई पेट्रोल पंपों पर हवा भरने वाली मशीनें तो लगी हुई हैं, लेकिन वहां हवा भरने के लिए कोई आदमी ही मौजूद नहीं होता। कई जगहों पर ये मशीनें महीनों से बंद पड़ी हैं, तो कुछ पंपों पर हवा की मशीन सिरे से गायब मिली। बात यहीं खत्म नहीं होती, प्यास लगने पर अगर आप पेट्रोल पंप पर पानी ढूंढेंगे, तो कई जगहों पर पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं मिलेगी।

टॉयलेट की स्थिति तो और भी खराब है। जिन पेट्रोल पंपों पर टॉयलेट बने हुए हैं, उनमें से ज्यादातर पर ताले लटके मिलते हैं। कुछ जगहों पर टॉयलेट खुले भी मिले, तो वे इतने गंदे थे कि कोई भी उनका इस्तेमाल नहीं कर सकता। साफ-सफाई और देखरेख के लिए किसी भी कर्मचारी को नहीं रखा गया है।

पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई पेट्रोल पंप चलाने वालों ने अपना खर्च बचाने के लिए हवा भरने वाले लड़कों को काम पर रखा ही नहीं है। ऐसे में जो लोग पेट्रोल डलवाने आते हैं, उन्हें खुद ही हवा की मशीन चलानी पड़ती है। जिन पंपों पर ऑटोमैटिक मशीनें लगी हैं, वहां भी ज्यादातर मशीनें खराब या बंद पड़ी मिलीं। वहीं, टॉयलेट भी सिर्फ अफसरों की चेकिंग के दौरान दिखाने के लिए बनाए गए लगते हैं। आम दिनों में उन पर हमेशा ताला लगा रहता है, जिससे ग्राहकों को कभी भी इसका फायदा नहीं मिल पाता।

इस बारे में तोरवा के रहने वाले विकास दुबे बताते हैं कि शहर के अधिकतर पेट्रोल पंपों पर हवा, पानी और टॉयलेट जैसी जरूरी चीजें मिलती ही नहीं हैं। कई जगह हवा की मशीन तो दिखती है, पर वह चालू नहीं रहती। पेट्रोल पंपों पर पानी और टॉयलेट का भी यही हाल है।

वहीं, भारतीय नगर के रहने वाले दिलीप कुमार बताते हैं कि उनका ऑफिस मस्तूरी इलाके में है। उनका रोज मस्तूरी रोड से आना-जाना होता है। राहुल फ्यूल्स समेत कई पंपों का उन्होंने जिक्र किया। उनका कहना है कि रोज गुजरने के बावजूद कहीं भी कोई भरोसेमंद सुविधा नहीं मिलती। कई बार अपनी गाड़ी में पेट्रोल भरवाने के बाद जब वे हवा डलवाने जाते हैं, तो कर्मचारी के न होने की बात कहकर मना कर दिया जाता है। ज्यादातर जगहों पर या तो मशीनें खराब होती हैं या फिर बंद पड़ी रहती हैं।