बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आसमान से बरसती आग और भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इस जानलेवा गर्मी के बीच अब बिजली विभाग का सिस्टम भी पूरी तरह से हांफने लगा है। जिले में बिजली की खपत में आए अचानक उछाल ने पूरे इन्फ्रास्ट्रक्चर की पोल खोल कर रख दी है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि लगातार बढ़ते लोड के कारण पिछले महज 10 दिनों के भीतर जिले में 28 ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर जल चुके हैं। इनमें शहर के 9 और ग्रामीण इलाकों के 19 ट्रांसफार्मर शामिल हैं।

NJV की इस रिपोर्ट में सामने आया है कि इस 'पावर क्राइसिस' के पीछे दो अलग-अलग वजहें हैं। जहां शहरी इलाकों में एयर कंडीशनर (AC) और कूलर के बेतहाशा इस्तेमाल ने ट्रांसफार्मरों की कमर तोड़ दी है, वहीं ग्रामीण इलाकों में अवैध हुकिंग और हीटर का अंधाधुंध इस्तेमाल सिस्टम पर भारी पड़ रहा है।

 

गांवों में चोरी और हुकिंग बनी सबसे बड़ी चुनौती

बिजली विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे बदतर स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की है। 10 दिन में जले 28 में से 19 ट्रांसफार्मर केवल गांवों के हैं। गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से निपटने के लिए ग्रामीण इलाकों में मोटरों का उपयोग एकाएक बढ़ गया है। इसके अलावा, बिना अनुमति के सीधे लाइन पर आंकड़े (हुकिंग) डालकर बिजली चोरी की जा रही है और हीटर जलाए जा रहे हैं। क्षमता से अधिक लोड पड़ने के कारण ट्रांसफार्मर धड़ाधड़ फेल हो रहे हैं।

पिछले एक साल के आंकड़े तो और भी डरावने हैं। बीते साल ग्रामीण इलाकों में 2000 से अधिक ट्रांसफार्मर खराब हुए थे, जबकि शहर में यह आंकड़ा 74 था। मेंटेनेंस के अभाव और समय पर जांच न होने के कारण यह समस्या नासूर बन चुकी है।

शहर में पीक ऑवर्स में फेल हो रहा सिस्टम

शहरी क्षेत्र भी इस अघोषित संकट से अछूते नहीं हैं। पिछले 10 दिनों में शहर के अंदर 9 ट्रांसफार्मर जवाब दे चुके हैं। दोपहर और शाम के वक्त जब चिलचिलाती धूप और उमस से बचने के लिए घरों में एक साथ एसी, कूलर और फ्रिज चालू होते हैं, तो पीक लोड अचानक बढ़ जाता है। पुराने और कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर इस अतिरिक्त दबाव को नहीं झेल पा रहे हैं। हाल ही में सिरगिट्टी स्थित बन्नाक चौक के पास भी एक ट्रांसफार्मर जलने के बाद बदला गया है।

नेहरूनगर से कुदुदंड तक त्राहिमाम, पानी के लिए तरसे लोग

 

मेंटेनेंस की सुस्त रफ्तार और विभागीय लापरवाही उपभोक्ताओं की परेशानी का सबब बन गई है। सोमवार रात से मंगलवार तक नेहरू नगर, राजकिशोर नगर और मोपका इलाके ट्रिपिंग और फॉल्ट से जूझते रहे।

 कुदुदंड का हाल:

सोमवार रात करीब 11 बजे कुआं चौक के पास 11 KV लाइन में फॉल्ट आ गया। फ्यूज कॉल सेंटर की टीम 2 घंटे की देरी से पहुंची और मरम्मत करने के बजाय काम को विभागीय टीम पर टाल कर चलती बनी। नतीजा यह हुआ कि रात भर ब्लैकआउट रहा और मंगलवार सुबह करीब 60 घरों में पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप रही। लोग फोन लगाते रहे, लेकिन अधिकारियों ने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। आखिरकार सुबह 11 बजे जाकर बिजली बहाल हो सकी।

 

 उसलापुर की परेशानी:

 

अल्का एवेन्यू में केबल फॉल्ट के कारण दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक बत्ती गुल रही। बार-बार ट्रिपिंग से लोग उमस में उबलते रहे।

क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?

शहर में लोड कम करने के लिए हमने लगभग 70 नए ट्रांसफार्मर लगाए हैं। असल समस्या यह है कि अक्सर उपभोक्ता अपने स्वीकृत लोड से कहीं ज्यादा बिजली का उपयोग कर रहे हैं, जिसके कारण यह समस्या सामने आ रही है।

 पी. श्रीनिवास राजू, अधीक्षण यंत्री (शहर)

लगातार बढ़ते लोड के कारण ही ट्रांसफार्मर खराब होने की शिकायतें आ रही हैं। विभाग पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है और जहां से भी ट्रांसफार्मर खराब होने की शिकायत मिल रही है, वहां प्राथमिकता के आधार पर उन्हें बदला जा रहा है।

 

अनुपम सरकार, कार्यपालन यंत्री (ग्रामीण)