बिलासपुर (NJV) व्यवस्था जब पूरी तरह संवेदनहीन हो जाए, तो एक गरीब की जिंदगी फाइलों और नियमों के पन्नों के बीच सिसक कर रह जाती है। न्यायधानी बिलासपुर में एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला और प्रशासनिक नाकामी को उजागर करने वाला मामला सामने आया है। 23 साल के एक युवक की जिंदगी 33 केवी हाईटेंशन लाइन के करंट ने इस कदर झुलसा दी कि जान बचाने के लिए उसके दोनों हाथ काटने पड़े। अब हालत यह है कि एक पैर भी कटने की नौबत आ गई है। बेटे के इलाज में परिवार की जमीन बिक गई, लाखों खर्च हो गए, लेकिन न तो सिस्टम का दिल पसीजा, न जिम्मेदारों की आंखें खुलीं। आखिरकार, बिलासपुर सांसद और केंद्रीय मंत्री तोखन साहू के जनदर्शन में जब यह दर्द छलका, तब जाकर सोई हुई व्यवस्था में हलचल मची।


मजदूरी का पहला दिन और जिंदगी भर का दर्द


कोटा थाना क्षेत्र के भरारी का रहने वाला 23 वर्षीय महावीर उजागर 29 मार्च को पहली बार मजदूरी के लिए घर से निकला था। ठेकेदार के जरिए उसे भरारी स्थित एक फार्म हाउस में निर्माण कार्य के लिए ले जाया गया था। काम के दौरान वह 33 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। बुरी तरह झुलसे महावीर को ट्रामा सेंटर लाया गया, जहां जान बचाने के लिए 3 अप्रैल को उसके दोनों हाथ काटने पड़े। संक्रमण के कारण अब पैर कटने का भी खतरा है।


बिक गई जमीन, सिस्टम मांगता रहा सर्टिफिकेट


गरीब परिवार ने इलाज में अब तक 8-10 लाख रुपए फूंक दिए हैं। जमीन बिक गई, लेकिन आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिला। संवेदनहीनता की हद तो तब पार हो गई जब मदद के लिए बिजली विभाग पहुंचे परिजनों से अफसरों ने 'विकलांगता प्रमाण पत्र' की मांग कर दी। जब मरीज अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा हो, तब कागजी प्रक्रियाओं का यह बेतुका हवाला प्रशासनिक प्राथमिकताओं और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है।


जनदर्शन में फूटा दर्द, मंत्री का सख्त एक्शन


दर-दर भटकने के बाद पीड़ित परिवार सीधे केंद्रीय मंत्री तोखन साहू के जनदर्शन पहुंचा और पूरी सच्चाई सामने रखी। मंत्री साहू ने तत्काल एक्शन लिया। उन्होंने मौके पर ही बिजली विभाग के आला अफसरों को तलब कर फटकार लगाई। स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर महावीर को फौरन रायपुर रेफर कराया और स्वेच्छा अनुदान सहित हर शासकीय मदद का ऐलान किया।


अमानवीयता: FIR दर्ज, लेकिन पुलिस के हाथ खाली


इस प्रकरण में फार्म हाउस संचालक सौमित्र दीवान का रवैया बेहद अमानवीय रहा। उनका तर्क है कि परिवार ने स्पष्ट मदद नहीं मांगी, इसलिए आर्थिक सहयोग नहीं किया। पीड़ित पक्ष ने इसे असंवेदनशील बताते हुए मुख्यमंत्री तक जाने की चेतावनी दी है। 2 अप्रैल को ठेकेदार और फार्म हाउस संचालक पर FIR दर्ज हो चुकी है, लेकिन अब तक पुलिसिया कार्रवाई पूरी तरह सिफर है।

मां की आंखों में सवाल- जवाबदेही तय कब होगी?

महावीर के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। बुजुर्ग मां के बुढ़ापे का एकमात्र सहारा अब बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है। मंत्री के हस्तक्षेप से रायपुर में इलाज की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन असल सवाल यह है कि क्या बिना जनदर्शन और वीआईपी दखल के आम आदमी को न्याय नहीं मिल सकता?