
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ पुलिस में थानों को बेहतर और आदर्श बनाने की नई पहल शुरू की गई है । प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अलग-अलग थानों को गोद लेकर उन्हें मॉडल थाना बनाने की जिम्मेदारी उठाई है । इसका उद्देश्य थानों के कामकाज, रिकॉर्ड संधारण, लंबित मामलों के निपटारे और फरियादियों को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार करना है ।
इसी पहल के तहत डीजीपी अरुण देव गौतम ने बिलासपुर जिले के रतनपुर थाना को गोद लिया है । वहीं बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने सिविल लाइन थाना को गोद लिया है । एसएसपी सोमवार को सिविल लाइन थाना पहुंचे और थाने के कामकाज का बारीकी से निरीक्षण किया ।
रोजनामचा और रिकॉर्ड की जांच, पेंडेंसी पर लगाई फटकार
निरीक्षण के दौरान एसएसपी रजनेश सिंह ने थाने का रोजनामचा, विभिन्न अपराधों से संबंधित रिकॉर्ड और लंबित प्रकरणों की फाइलों की जांच की । मामलों में पेंडेंसी देखकर उन्होंने विवेचकों से देरी का कारण पूछा और लंबित मामलों का जल्द निराकरण करने के निर्देश दिए । एसएसपी ने नए कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत दर्ज मामलों की जांच में अनावश्यक देरी नहीं करने को कहा । उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में बिना वजह देरी हो रही है, उनमें संबंधित अधिकारियों पर अर्थदंड की कार्रवाई की जा सकती है ।
ई-समंस और मेडिकल रिपोर्ट की भी ली जानकारी
एसएसपी ने ई-समंस और वारंट की तामीली की स्थिति की भी जानकारी ली । इसके अलावा मेडलीफायर में आने वाली मेडिकल रिपोर्ट की स्थिति के बारे में अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की । उन्होंने लंबित रिपोर्ट और दस्तावेजों के कारण जांच प्रभावित न हो, इसके लिए समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ।
सीसीटीएनएस का काम देखकर हुए प्रभावित
निरीक्षण के दौरान एसएसपी ने सीसीटीएनएस के कामकाज को भी देखा । थाने की टीम द्वारा किए जा रहे काम से वे प्रभावित नजर आए । उन्होंने बेहतर कार्य करने वाली टीम को प्रोत्साहित करने और इनाम देने की बात कही ।
एसएसपी ने थाना भवन के रखरखाव पर भी जोर दिया । उन्होंने थाना भवन का रंग-रोगन और नए गेट का काम जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए, ताकि थाने का वातावरण बेहतर और व्यवस्थित बनाया जा सके । इस दौरान सीएसपी परमेश्वर तिलकवार और थाना प्रभारी किशोर केंवट सहित पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे ।
वरिष्ठ अफसरों की सीधी निगरानी से बदलेगा थानों का कामकाज
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा थानों को गोद लेने से गंभीर और अनसुलझे अपराधों की केस डायरी की नियमित समीक्षा हो सकेगी । लंबित मामलों, वारंटों और शिकायतों के निपटारे के लिए समय-सीमा तय कर उसकी निगरानी की जाएगी । साथ ही थाना भवन के रखरखाव, रिकॉर्ड संधारण और फरियादियों के साथ पुलिस के व्यवहार में सुधार पर भी वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी नजर रहेगी ।