
बिलासपुर. न्यायधानी बिलासपुर में जमीनों का खेल अब एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. शहर के तेज विस्तार के साथ ही भूमाफियाओं की नजरें शहर से लगे ग्रामीण इलाकों पर गड़ गई हैं. तखतपुर क्षेत्र के ग्राम घुरू अमेरी सैदा और पांड में इन दिनों सत्ता और प्रशासन की मिलीभगत का एक बड़ा सिंडिकेट पूरी सक्रियता से काम कर रहा है. यहां शासन की रोक के बावजूद अवैध प्लॉटिंग का कारोबार धड़ल्ले से जारी है और इस पूरे काले खेल का मास्टरमाइंड एक ऐसा बिल्डर है जो पहले मेडिकल व्यवसाय से जुड़ा था.
अब यह पूर्व मेडिकल कारोबारी बेखौफ होकर जमीनों की चीरफाड़ कर रहा है. बताया जा रहा है कि इस बिल्डर के सिर पर एक बड़े कद्दावर भाजपा नेता का मजबूत हाथ है. इसी राजनीतिक रसूख के दम पर पंचायत और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के सारे नियमों को ताक पर रख दिया गया है. इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है. प्रशासन के सख्त निर्देशों और अवैध प्लॉटिंग पर लगी पाबंदी के बावजूद पटवारी और तहसीलदार नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं. बिना किसी डर के जमीनों का धड़ल्ले से नामांतरण किया जा रहा है. ऐसा प्रतीत होता है कि पूरा सिस्टम इस रसूखदार बिल्डर के सामने नतमस्तक हो चुका है.
इधर एक अन्य बिल्डर ने अपनी तिजोरी भरने के लिए इलाके के प्रमुख गोकले नाला को पाटना शुरू कर दिया है. नाले के प्राकृतिक बहाव को मिट्टी से पाटकर वहां भी प्लॉट काटे जा रहे हैं. बारिश के दिनों में यह नाला पानी निकासी का बड़ा जरिया होता है और इसे चोक करने से आने वाले समय में इन गांवों में बाढ़ और जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा होना तय है.
राजस्व और नगर निगम के हालिया रिकॉर्ड बताते हैं कि बिलासपुर जिले में पहले ही सैकड़ों अवैध कॉलोनियों को चिन्हित कर सूची बनाई जा चुकी है लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल रस्म अदायगी होती है. रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी रेरा के सख्त कानूनों का यहां कोई खौफ नहीं बचा है. जब सत्ताधारी दल के बड़े नेता का संरक्षण और भ्रष्ट राजस्व अधिकारियों का सीधा साथ मिल जाए तो फिर आम जनता और पर्यावरण की परवाह किसे है ।