आजकल Gut Health यानी आंतों की सेहत को लेकर काफी चर्चा होती है, लेकिन इसे लेकर लोगों के बीच कई गलतफहमियां भी हैं. कई लोग मानते हैं कि गट हेल्थ का मतलब सिर्फ पेट ठीक रहना है, जबकि हकीकत इससे कहीं ज्यादा व्यापक है. विशेषज्ञों के अनुसार, गट हेल्थ का संबंध केवल पेट से नहीं, बल्कि छोटी-बड़ी आंत, भोजन नली, लिवर, पैंक्रियाज और आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया (Gut Microbiome) से भी होता है.

क्या होती है Gut Health?
विशेषज्ञों के मुताबिक, गट हेल्थ का मतलब सिर्फ सही पाचन नहीं है. इसमें आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन, पोषक तत्वों का सही अवशोषण और पाचन तंत्र का स्वस्थ तरीके से काम करना भी शामिल है. यदि भोजन अच्छी तरह पच रहा है, शरीर जरूरी पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित कर रहा है, पेट नियमित रूप से साफ रहता है और आंतों का माइक्रोबायोम संतुलित है, तो इसे अच्छी गट हेल्थ माना जाता है.

क्यों जरूरी है स्वस्थ गट?
गट को अक्सर शरीर का 'दूसरा दिमाग' कहा जाता है, क्योंकि इसका असर केवल पाचन तक सीमित नहीं रहता. यह इम्यून सिस्टम, मानसिक स्वास्थ्य और शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावित करता है. विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर की लगभग 70 प्रतिशत इम्यूनिटी आंतों से जुड़ी होती है. स्वस्थ गट हानिकारक बैक्टीरिया और संक्रमण से बचाने में भी अहम भूमिका निभाता है.

गट हेल्थ से जुड़े आम मिथक

1. डिटॉक्स ड्रिंक और प्रोबायोटिक ही काफी हैं
डॉ. साद अनवर के अनुसार, यह मान लेना गलत है कि रोज डिटॉक्स ड्रिंक पीने या प्रोबायोटिक सप्लीमेंट लेने से हर किसी की गट हेल्थ बेहतर हो जाएगी. हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है, इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट लेना हमेशा सही नहीं होता.

2. पेट दर्द नहीं, तो गट पूरी तरह स्वस्थ है
कई लोग सोचते हैं कि अगर गैस, कब्ज या पेट दर्द नहीं है तो उनकी गट हेल्थ बिल्कुल ठीक है. जबकि कई बार आंतों से जुड़ी समस्याएं शुरुआती दौर में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी मौजूद हो सकती हैं.

3. सिर्फ दही खाने से गट हेल्दी रहती है
दही प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत जरूर है, लेकिन केवल दही के भरोसे गट हेल्थ बेहतर नहीं रखी जा सकती. संतुलित आहार, पर्याप्त फाइबर, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और हेल्दी लाइफस्टाइल भी उतने ही जरूरी हैं.

गट हेल्थ बेहतर रखने के आसान तरीके

  • फाइबर से भरपूर संतुलित आहार लें.
  • दही और अन्य प्राकृतिक प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें.
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं.
  • रोजाना शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करें.
  • अच्छी और पर्याप्त नींद लें.

बिना जरूरत एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने से बचें, क्योंकि इससे आंतों के अच्छे बैक्टीरिया प्रभावित हो सकते हैं. अगर लंबे समय तक गैस, कब्ज, अपच, पेट दर्द या अन्य पाचन संबंधी समस्याएं बनी रहें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है. स्वस्थ गट सिर्फ बेहतर पाचन ही नहीं, बल्कि बेहतर इम्यूनिटी और ओवरऑल हेल्थ की भी मजबूत नींव है.