
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पेण्ड्रा नगर में कथित उद्योगपति गोपाल कृष्ण अग्रवाल की जी.के. टाउनशिप का अवैध कॉलोनी निर्माण और इसका काला खेल अब गंभीर सवालों के घेरे में आ चुका है। यह पूरा मामला सिर्फ बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करने तक ही सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ शासकीय भूमि का उपयोग, मुख्य मार्ग पर अवैध निर्माण, बिना वैधानिक स्वीकृति के प्लॉटिंग और प्रशासनिक निष्क्रियता जैसे कई बड़े सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
सरकारी खसरे पर बिछा दी सड़क और लगा दी स्ट्रीट लाइट
राजस्व विभाग के भुइयां पोर्टल और उपलब्ध खसरा अभिलेखों के आंकड़े इस पूरे फर्जीवाड़े की पोल खोलते हैं। खसरा क्रमांक 605/4, 602/11 के अलावा 607/12 और 607/22 भी शासकीय भूमि के रूप में दर्ज हैं। लेकिन मौके पर इन्ही शासकीय भूमियों का उपयोग कॉलोनी के विकास में कर लिया गया है। आम नागरिकों को लुभाने के लिए यहां सड़क, डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट और अन्य आधारभूत सुविधाएं विकसित कर दी गई हैं। बाहरी आवरण ऐसा बनाया गया है जिससे यह पूरी तरह वैध दिखे, जबकि इसके लिए कोई वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त नहीं की गई हैं।
अधिनियम का उल्लंघन, नोटिस फाइलों में दबे
उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, 24 फरवरी 2026 को नगर पालिका परिषद पेंड्रा ने गोपाल कृष्ण अग्रवाल और जी.के. टाउनशिप को अलग-अलग नोटिस जारी किए थे। इसमें स्पष्ट उल्लेख था कि बिना सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के हो रहा यह निर्माण छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 339-क और 339-ख का खुला उल्लंघन है। कॉलोनाइजर लाइसेंस निरस्त करने की चेतावनी देते हुए सात दिवस के भीतर जवाब मांगा गया था। पांच माह गुजर जाने के बाद भी नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया, उल्टे निर्माण निरंतर जारी रहा।
एसडीएम को शिकायत, फिर भी खड़ा हो गया होटल
यह अवैध निर्माण कोई अंदरूनी इलाके में नहीं, बल्कि पेण्ड्रा-गौरेला मुख्य मार्ग पर हो रहा है, जहां से प्रतिदिन जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं। कॉलोनी परिसर के अंदर ही शासकीय भूमि पर एक बड़ा होटल भी बना दिया गया है। मामले की जानकारी एसडीएम पेंड्रारोड को भी कई बार दी गई, लेकिन हर बार महज जांच कराने का आश्वासन ही मिला। राजस्व अधिकारियों की यह चुप्पी उनकी भूमिका को संदिग्ध बनाती है।
सत्ताधारी विधायक के नाम का खौफ
प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए राजनीतिक रसूख का कार्ड भी खेला जा रहा है। इलाके में चर्चा है कि कॉलोनाइजर को न्यायधानी के एक तत्कालीन मंत्री और वर्तमान सत्ता दल के विधायक का वरदहस्त प्राप्त है। अधिकारियों पर इन्ही नेता जी का डर दिखाया जाता है। हालांकि, यह जांच का विषय है कि क्या वाकई नेताजी ने संरक्षण दिया है या केवल उनके नाम का दुरूपयोग किया जा रहा है।
एक भी अनुमति जारी नहीं हुई: अध्यक्ष
नगर पालिका पेंड्रा के अध्यक्ष राकेश जालान ने बताया कि कॉलोनी के लिए कोई भी अनुमति जारी नहीं की गई है। नियमानुसार लगभग 10 प्रतिशत भूमि नगर प्रशासन को हस्तांतरित करनी होती है, जिसका पालन नहीं हुआ है। उनके अनुसार यहां प्लॉटिंग, गेट और होटल पूरी तरह अवैध हैं और नियमों के तहत यहां एक भी प्लॉट की बिक्री नहीं हो सकती।