
रायपुर। महादेव बेटिंग एप और स्काई एक्सचेंज के मामले में कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। हवाला के जरिए सट्टे का पैसा हासिल करने के आरोप में ईडी ने सोमवार को कारोबारी विकास गर्ग को दिल्ली से हिरासत में लिया। दिल्ली में पकड़े जाने के बाद कारोबारी को रायपुर लाया गया, जहां उससे सघन पूछताछ शुरू कर दी गई है। एजेंसी के अनुसार, विकास गर्ग महादेव एप के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल का करीबी सहयोगी रहा है। महादेव नेटवर्क का पैसा हवाला के रास्ते विकास गर्ग के पास आता था और फिर इसे अलग-अलग जगह निवेश किया जाता था।
काले धन को ऐसे बनाता था सफेद
प्रमोटर विकास गर्ग काफी समय से ईडी के रडार पर था। उस पर आरोप है कि उसने सट्टेबाजी से मिले अवैध धन को शैल कंपनियों और फर्जी एंट्री ऑपरेटरों के जरिए कई स्तरों पर घुमाया। इसके बाद इस काली कमाई को पूरी तरह से वैध बनाने के लिए उसने शेयर बाजार, रियल एस्टेट और कॉरपोरेट अधिग्रहण में भारी निवेश किया।
जांच में यह बात सामने आई कि विकास ने एराया लाइफस्पेसेज के माध्यम से एबिक्सकैश में करीब 64 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है। इसके साथ ही उसकी गोवा और नैनीताल में मौजूद महंगी संपत्तियों का भी पता चला है। ईडी के अनुसार, विकास इकोटेक, विकास लाइफकेयर और एराया लाइफस्पेसेज लिमिटेड का संचालन उसी के द्वारा किया जाता रहा है।
अब तक कुल 3800 करोड़ की संपत्तियां कुर्क
गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ही ईडी ने कार्रवाई करते हुए विकास गर्ग और उसके परिवार से संबंध रखने वाली कंपनियों की 940.77 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की थीं। इस जब्ती के बाद ही कारोबारी पर जांच का शिकंजा और कसा गया। महादेव सट्टा एप केस में अब तक कुल 3800 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच हो चुकी हैं। इससे पहले भी इस मामले में 2825 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की गई थीं। लगातार हो रही कार्रवाई से सट्टा नेटवर्क चलाने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।
हर महीने होती थी 450 करोड़ से ज्यादा की अवैध कमाई
ईडी ने यह पूरी जांच छत्तीसगढ़ के दुर्ग और रायपुर सहित आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई अलग-अलग राज्यों में दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच एजेंसी का दावा है कि विदेश से संचालित होने वाला यह पूरा ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क हर महीने 450 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध कमाई करता था। यह सारा पैसा हवाला नेटवर्क के माध्यम से देश के भीतर लाया जाता था और फिर फर्जी कंपनियों के जरिए शेयर बाजार और प्रॉपर्टी में निवेश किया जाता था।
रायपुर में ईडी के अधिकारी अब विकास गर्ग से इसी निवेश और हवाला ऑपरेटरों के बारे में विस्तार से पूछताछ कर रहे हैं। आने वाले समय में पूछताछ के आधार पर कुछ और कारोबारियों पर भी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।