पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में सामने आए करोड़ों रुपये के ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क की तस्वीर सामने ला दी है। एक बुजुर्ग को CBI अधिकारी बनकर डराने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर उससे 10.74 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ट्रांसफर करा ली। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम को एक-दो नहीं, बल्कि 5,436 अलग-अलग बैंक खातों के जरिए घुमाया गया। इस मामले में पुलिस अब उन लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है, जिन्होंने रकम को आगे ट्रांसफर करने, निकालने या नेटवर्क तक पहुंचाने में मदद की।

CBI अधिकारी बनकर शुरू हुआ डर का खेल
पुलिस के मुताबिक साइबर ठगों ने बुजुर्ग को फोन कर खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI का अधिकारी बताया। इसके बाद उन्हें एक कथित आपराधिक मामले में फंसने का डर दिखाया गया। ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का दबाव बनाते हुए कहा कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए उन्हें अपनी रकम बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर करनी होगी। डर और दबाव के बीच बुजुर्ग ने अलग-अलग खातों में कुल ₹10,74,65,000 ट्रांसफर कर दिए।

एक ट्रांजैक्शन ने खोला जांच का रास्ता
पुलिस की जांच में एक अहम ट्रांजैक्शन सामने आया। 30 जनवरी 2026 को पीड़ित की ओर से 75 लाख रुपये एक Yes Bank खाते में भेजे गए थे। इसके बाद रकम का एक हिस्सा Bank of Maharashtra के अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया। साइबर क्राइम पोर्टल से मिले डेटा और CCTV फुटेज की मदद से पुलिस ने इस लेन-देन की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं। इसी जांच के आधार पर हर्षद सुभाष धंतोले और समर्थ सुरेश देशमुख को गिरफ्तार किया गया था।

ATM से निकली रकम ने जोड़ा अगला लिंक
पूछताछ के दौरान पुलिस को आरोपियों से जुड़े पैसों के लेन-देन की जानकारी मिली। जांचकर्ताओं के अनुसार, ATM से निकाली गई कुछ नकदी रोहन जाधव नाम के व्यक्ति तक पहुंचाई गई थी। इसके बाद पुलिस ने जाधव से जुड़े वित्तीय लेन-देन और अन्य संपर्कों की जांच शुरू की। इसी कड़ी में सोलापुर से अमर शिवाजी अत्तरगी को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार उसके बैंक खाते में ठगी की रकम में से करीब 5 लाख रुपये पहुंचे थे, जिन्हें बाद में चेक के जरिए निकाला गया।

5,436 खातों में घूमी करोड़ों की रकम
इस केस की सबसे चौंकाने वाली बात रकम को छिपाने के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की संख्या है। पुलिस जांच में सामने आया कि पीड़ित से ठगी गई रकम को 5,436 बैंक खातों के नेटवर्क के जरिए घुमाया गया। जांच के दौरान पुलिस ने अब तक करीब 1.34 करोड़ रुपये की रकम फ्रीज किए जाने की जानकारी दी है। इससे संकेत मिलता है कि साइबर ठगी के पीछे एक संगठित वित्तीय नेटवर्क काम कर रहा था।

जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतने बड़े स्तर पर बैंक खातों की व्यवस्था किस तरह की गई और रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। शुरुआती जांच में गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के जरिए देशभर में दर्ज अन्य साइबर अपराधों की कड़ियां भी सामने आने की बात कही गई है। रोहन जाधव के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर होने, विदेशी संपर्कों और कथित हांगकांग कनेक्शन से जुड़े दावों की भी जांच की जा रही है। हालांकि, इन पहलुओं पर पुलिस की विस्तृत आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बढ़ रही ठगी
इस मामले ने एक बार फिर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर चल रहे साइबर फ्रॉड को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ठग आमतौर पर खुद को पुलिस, CBI, ED या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं और फिर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं। पुलिस लगातार लोगों को आगाह कर रही है कि कोई भी सरकारी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को पैसे किसी ‘सुरक्षित खाते’ में जमा करने का निर्देश नहीं देती। पुणे का यह मामला अब सिर्फ 10.74 करोड़ रुपये की ठगी तक सीमित नहीं रह गया है। 5,436 बैंक खातों तक पहुंची जांच इस बात की ओर इशारा कर रही है कि इसके पीछे एक बड़ा और बहुस्तरीय साइबर नेटवर्क हो सकता है।