
रायपुर। देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत भाषा शिक्षा को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में नौवीं और दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होंगी। इस नई व्यवस्था को 1 जुलाई से लागू किया जाएगा।
सीबीएसई के इस फैसले का उद्देश्य केवल भाषा पढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देना भी माना जा रहा है। बोर्ड ने साफ किया है कि यदि कोई छात्र विदेशी भाषा चुनना चाहता है, तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि बाकी दो भाषाएं भारतीय हों। अन्यथा विदेशी भाषा को अतिरिक्त विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत भाषा शिक्षा को एनसीईआरटी के नए पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप तैयार किया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि दसवीं कक्षा में तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर ही किया जाएगा। हालांकि नई व्यवस्था के लागू होने के साथ स्कूलों के सामने पाठ्यपुस्तकों, शिक्षकों और भाषा विकल्पों को लेकर नई चुनौतियां भी होंगी। वहीं शिक्षा विशेषज्ञ इसे भारतीय भाषाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं। अब इस फैसले का सीधा असर देशभर के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों पर पड़ने वाला है।