रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब छात्रों की पढ़ाई का आकलन पारंपरिक तरीकों से नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किया जाएगा। शिक्षा विभाग एक विशेष तकनीकी टूल के जरिए बच्चों की सीखने की क्षमता को समझने और उसे बेहतर बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

इस पहल के तहत “ओरल रीडिंग फ्लुएंसी (ORF)” आधारित AI टूल का उपयोग किया जाएगा, जो छात्रों की आवाज रिकॉर्ड कर उसे टेक्स्ट में बदलता है और कुछ ही मिनटों में उनकी पढ़ने की गति, उच्चारण और समझने की क्षमता का विश्लेषण कर देता है। यह तकनीक शिक्षकों को बच्चों की कमजोरियों को पहचानने और उन्हें सुधारने में मदद करेगी, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।

इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दो जिलों में शुरू किया जाएगा। सफल परीक्षण के बाद इसे पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी है। खास बात यह है कि इस टूल को स्थानीय भाषाओं और बोलियों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसके लिए विभिन्न जिलों से घंटों का डेटा एकत्र किया गया है, ताकि हर क्षेत्र के छात्र इससे लाभान्वित हो सकें।

सरकार का मानना है कि AI आधारित यह पहल बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे न सिर्फ बच्चों की सीखने की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि शिक्षकों को भी डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में यह मॉडल राज्य की शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।