बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के Bilaspur स्थित Chhattisgarh High Court ने जमीन विवाद से जुड़े चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी पिता-पुत्र की सजा के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि मामले में प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान पर्याप्त और विश्वसनीय हैं, जिससे दोषसिद्धि पर कोई संदेह नहीं बनता।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में विशेष रूप से घायल गवाह की गवाही को महत्वपूर्ण मानते हुए स्पष्ट किया कि किसी गवाह को केवल इसलिए अविश्वसनीय नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि वह पीड़ित पक्ष से संबंधित है। अदालत ने कहा कि घटनास्थल पर घायल गवाह की मौजूदगी स्वाभाविक होती है और उसके बयान की विश्वसनीयता का आकलन तथ्यों की संगति और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।

मामला Mahasamund जिले के तुमगांव थाना क्षेत्र के ग्राम जोबा का है, जहां सितंबर 2020 में जमीन विवाद के चलते आरोपियों ने एक परिवार पर हमला किया था। आरोप है कि उन्होंने घर में घुसकर पहले मिर्च पाउडर फेंका और फिर धारदार हथियार से हमला कर तीन लोगों की हत्या कर दी, जबकि अन्य परिजनों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। पुलिस जांच के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर चालान पेश किया गया था।

निचली अदालत ने आरोपियों को हत्या, हत्या के प्रयास और घर में घुसकर हमला करने जैसे अपराधों में आजीवन कारावास सहित विभिन्न सजाएं सुनाई थीं। अपील में आरोपियों ने स्वतंत्र गवाहों के अभाव और गवाहों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे, जिन्हें हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले को न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि ठोस परिस्थितिजन्य साक्ष्य और विश्वसनीय गवाही के आधार पर दोषियों को सजा से राहत नहीं दी जाएगी।