मनेंद्रगढ़। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत जिन बेटियों के हाथ पीले कर सरकार ने सम्मान और सुरक्षा का संदेश देने का दावा किया था, आज वही बेटियां अपने मंगलसूत्र को लेकर सवाल उठा रही हैं। एमसीबी जिले में सामने आए इस विवाद ने न सिर्फ योजना की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सरकारी खरीद और गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी व्यवस्था को कटघरे में ला खड़ा किया है।

10 फरवरी 2026 को आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 189 जोड़ों का विवाह कराया गया था। शादी के दौरान नवविवाहिताओं को उपहार स्वरूप मंगलसूत्र और अन्य सामग्री वितरित की गई थी। लेकिन कुछ ही महीनों बाद कई दुल्हनों ने शिकायत की है कि उनका मंगलसूत्र काला पड़ने लगा है। जब इसकी जांच कराई गई तो दावा किया गया है कि जिसे चांदी का बताकर दिया गया था, वह गिलेट का निकला। इसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर गरीब बेटियों के नाम पर चलाई जा रही योजना में गुणवत्ता से समझौता किसने किया? क्या खरीद प्रक्रिया में लापरवाही हुई या फिर किसी ने सरकारी पैसे बचाने के नाम पर बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ किया? जिन हाथों में शादी के प्रतीक के रूप में मंगलसूत्र पहनाया गया था, आज वही हाथ प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं।

नवविवाहिताओं का कहना है कि अगर सरकार गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध नहीं करा सकती थी, तो उपहार के बदले राशि दे देती। वे अपनी पसंद और भरोसे के अनुसार मंगलसूत्र खरीद लेतीं। अब प्रभावित महिलाओं ने नकली बताए जा रहे मंगलसूत्र के बदले नकद राशि देने की मांग उठाई है।

मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जनकल्याणकारी योजनाएं गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए होती हैं, लेकिन यदि उन्हीं योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगें तो जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है।

राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे ने हलचल बढ़ा दी है। विपक्ष ने इसे गरीब बेटियों के सम्मान से जुड़ा मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। वहीं प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। क्योंकि सवाल सिर्फ एक मंगलसूत्र का नहीं है, सवाल उस भरोसे का है जो बेटियों और उनके परिवारों ने सरकार की योजना पर किया था। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गरीब बेटियों के विश्वास के साथ किया गया बड़ा खिलवाड़ माना जाएगा।