
रायपुर। एथेनॉल प्लांट के लिए सरकारी गोदाम से निकला चावल गाड़ियों को तो रफ्तार नहीं दे पाया, लेकिन रसूखदारों की तिजोरियों का माइलेज जरूर बढ़ा गया। 1160 करोड़ रुपए के फोर्टिफाइड चावल घोटाले की लपटें अब मध्य प्रदेश की सीमा पार कर छत्तीसगढ़ के राइस मिलों तक पहुंच चुकी हैं। एसआईटी की जांच में यह बात निकलकर आई है कि छिंदवाड़ा के ‘एवीजे एग्रो एथेनॉल प्लांट’ के नाम पर जो चावल आवंटित किया गया था, वह वहां जाने के बजाय छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में स्थित चिचोला की गुरुदेव (लक्ष्मी) राइस मिल में खपा दिया गया। जांच एजेंसियों के रडार पर अब वह पूरा अंतरराज्यीय गठजोड़ है, जिसने इस सरकारी अनाज की हेराफेरी की पटकथा लिखी।
पूर्व मंत्री का परिवार राडार पर
इस पूरी हेराफेरी में जो नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है, वह मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और भाजपा के बालाघाट जिलाध्यक्ष रामकिशोर कांवरे के परिवार का है। कांवरे परिवार की राइस मिल ‘हर्ष इंडस्ट्रीज’ इस मामले के केंद्र में नजर आ रही है। पुलिस ने अपनी कार्रवाई करते हुए बीते 24 जुलाई को इसी मिल के एक पार्टनर विनोद शर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। इसके अलावा पूर्व मंत्री के भाई कुमार कांवरे और भतीजे अविनाश कांवरे से पुलिस कई राउंड की पूछताछ कर चुकी है। जांच दल ने फैक्ट्री में दबिश देकर वहां से डीवीआर और कई अन्य दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए हैं।
सीसीटीवी और रजिस्टर की एंट्री से खुली पोल
एसआईटी को जांच के दौरान जो सीसीटीवी फुटेज, रजिस्टर की एंट्री और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, वे पूरी कहानी खुद बयां कर रहे हैं। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर जांच दल ने यह साबित किया है कि वेयरहाउस से जो चावल एथेनॉल बनाने के लिए निकला था, उसका असली ठिकाना हर्ष इंडस्ट्रीज ही था। नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक ने भोपाल एफसीआई के महाप्रबंधक को बाकायदा पत्र लिखकर 14 राइस मिलों और गोदामों की पूरी लिस्ट थमा दी है, जहां-जहां यह चावल उतारा गया।
तीन राज्यों में फैला है नेटवर्क
इस घोटाले का दायरा सिर्फ एक-दो जिलों तक सीमित नहीं है। एफसीआई को सौंपी गई लिस्ट में मध्य प्रदेश के बालाघाट और सिवनी, महाराष्ट्र के गोंदिया और छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के ठिकाने शामिल हैं। अब तक इस गबन के मामले में 20 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें से 13 आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ दिल्ली एफसीआई मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालय की टीमें भी अपनी-अपनी जांच कर रही हैं।
जिम्मेदारी का ठीकरा दिल्ली के सिर
इन सबके बीच मध्य प्रदेश के खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत का बयान गौर करने लायक है। उन्होंने कहा है कि एफसीआई और एथेनॉल प्लांट तो केंद्र सरकार के अधीन आते हैं, इसलिए इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। व्यंग्य की बात यही है कि घोटाला राज्य की जमीन पर हुआ, राइस मिलें और गोदाम स्थानीय नेताओं के हैं, राशन यहां की सड़कों से गुजरा, लेकिन अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ते हुए सारा ठीकरा दिल्ली के सिर फोड़ दिया गया है। फिलहाल, कड़ियां जुड़ रही हैं और आने वाले दिनों में कई और सफेदपोश बेनकाब हो सकते हैं।