धमतरी। सिर पर छत हो, लेकिन हर रात उसी छत के गिरने का डर सताए, तो जिंदगी कितनी मुश्किल हो जाती है। धमतरी के विवेकानंद वार्ड स्थित अटल आवास में रहने वाले रोशन टंडन का परिवार इन दिनों ऐसी ही भयावह स्थिति से गुजर रहा है। मकान की छत का एक हिस्सा गिर चुका है और बाकी हिस्से की हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है। घर में मासूम बच्ची की सुरक्षा को लेकर परिजन इतने डरे हुए हैं कि रात में उसे सुलाते समय ऊपर कुर्सी रख देते हैं, ताकि दोबारा मलबा गिरने की स्थिति में चोट से बचाव हो सके। सुरक्षित ठिकाना नहीं होने के कारण परिवार को खतरे के बीच ही रहने की मजबूरी है।

छत गिरने के बाद हर रात दहशत में गुजर रही
रोशन टंडन के मुताबिक, छत का हिस्सा गिरने के बाद मकान में रहना लगातार जोखिम भरा बना हुआ है। परिवार को आशंका है कि छत का बचा हुआ हिस्सा भी कभी भी टूटकर गिर सकता है। सबसे ज्यादा डर उन्हें अपनी छोटी बच्ची को लेकर है। रात में बच्ची को सुलाते समय उसके ऊपर कुर्सी रख दी जाती है, ताकि यदि मलबा गिरे तो सीधे उसे चोट न पहुंचे। एक परिवार के लिए यह केवल मकान की मरम्मत का मामला नहीं, बल्कि हर दिन अपनी और अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर जूझने की स्थिति है।

न सुरक्षित ठिकाना, न काम पर जाने की गुंजाइश
इस हादसे ने रोशन टंडन के परिवार की आर्थिक मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। रोशन ही घर में कमाई का मुख्य सहारा हैं, लेकिन हादसे के बाद से उनका काम पर जाना भी प्रभावित हुआ है। परिवार के सामने एक ओर रोजमर्रा के खर्चों का संकट है, तो दूसरी ओर सुरक्षित आवास की चिंता। रोशन के अनुसार, अटल आवास परिसर में कुछ कमरे खाली पड़े हैं, लेकिन उन पर ताला लगा हुआ है। ऐसे में परिवार के पास रहने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है और उन्हें क्षतिग्रस्त मकान में ही समय गुजारना पड़ रहा है।

प्रशासन से सुरक्षित आवास और भवन निरीक्षण की मांग
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से तत्काल मदद की अपील की है। उनकी मांग है कि पहले उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर रहने की व्यवस्था दी जाए, ताकि परिवार को छत गिरने के खतरे के बीच न रहना पड़े। साथ ही, प्रभावित मकान और परिसर के अन्य भवनों का तकनीकी निरीक्षण कराकर उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए। अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी संभावित बड़े हादसे से पहले परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगा? रोशन टंडन का परिवार फिलहाल राहत और सुरक्षित आश्रय की उम्मीद लगाए बैठा है।