
रायपुर।छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में ऐसा खेल चल रहा है कि सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। 5 हजार 576 करोड़ रुपये के टेंडरों में नियमों को ताक पर रखकर अपात्र ठेकेदारों को रातों-रात काबिल बना दिया गया। भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मुख्य सचिव और विभागीय सचिव को सौंपे शिकायती पत्र से मंत्रालय में हड़कंप मच गया है। उन्होंने पूरे दस्तावेजों के साथ घोटाले की परतें उधेड़ दी हैं।
मामला सिकासर-कोडार, मोहमेला-सिरपुर और मटनार-देवरगांव बैराज के टेंडरों से जुड़ा है। इन तीनों प्रोजेक्ट्स में जमकर मलाई काटी गई। जनता के पैसों की बंदरबांट की तैयारी चल रही थी।
मटनार-देवरगांव बैराज: 1636 करोड़ का खेल
जगदलपुर के इस बैराज की निर्माण लागत 1636 करोड़ रुपये से ज्यादा है। यहां एल-1 बनी एनसीसी लिमिटेड। कंपनी के पास टेंडर में मांगी गई भौतिक क्षमता ही नहीं थी, फिर भी अधिकारियों ने उसे पात्र मान लिया। एल-2 रित्विक प्रोजेक्ट्स ने और बड़ा खेल किया। इस कंपनी को अरुणाचल प्रदेश में दिबांग प्रोजेक्ट का 14,445 करोड़ का काम मिला हुआ था। ठेकेदार ने इस जानकारी को छिपाया। उसने अपनी बिड कैपेसिटी 4294 करोड़ बताई। छिपे काम को जोड़ने पर कैपेसिटी माइनस 10,151 करोड़ हो जाती है। मतलब पूरी तरह अपात्र। दोनों ठेकेदार अयोग्य होने के बावजूद 27 जुलाई 2026 की रात गुपचुप तरीके से निविदा खोल दी गई।
सिकासर-कोडार: गलत अनुभव प्रमाण पत्र से 2549 करोड़ का ठेका
गरियाबंद कैनाल पर 2549 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में एल-1 दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड को बना दिया गया। शर्त थी कि ठेकेदार के पास कम से कम 1274 करोड़ के समान प्रकृति के काम का स्वतंत्र अनुभव हो। पहले गलत अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर पात्रता हासिल कर ली गई। मध्य प्रदेश जल निगम ने 1 सितंबर 2026 को संशोधित प्रमाण पत्र जारी कर पोल खोल दी। गांधी सागर-2 योजना के जॉइंट वेंचर में दिलीप बिल्डकॉन का हिस्सा सिर्फ 65 प्रतिशत था। 1302 करोड़ के काम में उसका अनुभव महज 846 करोड़ ठहरता है। मांगी गई योग्यता से 428 करोड़ कम। फिर भी अफसरों ने आंखें मूंदकर ठेका थमा दिया।
मोहमेला-सिरपुर बैराज: 574 करोड़ में भी वही कहानी
रायपुर के पास आरंग में 574 करोड़ की लागत वाले इस बैराज में एल-1 ओम मेटल्स ने अपना वर्क-इन-हैंड पूरा नहीं दिखाया। काम छिपाकर बिड कैपेसिटी सेट कर ली। एल-2 दिलीप बिल्डकॉन के वित्तीय दस्तावेज भी त्रुटिपूर्ण और असंगत मिले। दोनों अपात्र, लेकिन सिस्टम मेहरबान रहा।
14 अफसरों की भूमिका कटघरे में
पूर्व विधायक कमरो ने पूरी लिस्ट सौंप दी है। प्रमुख अभियंता जितेन्द्र नेताम पर आरोप है कि उन्होंने नई नोटशीट चलवाकर अपात्र कंपनियों को पात्र घोषित करवाया। मुख्य अभियंता (निविदा) आबताब आलम, ईई संजय गुप्ता, अरविन्द कोसले और अनन्या गुप्ता ने पात्रता वाली नोटशीटें तैयार कीं। गरियाबंद के एसई आई.ए. सिद्दीकी और ईई एस.के. बर्मन, ओएसडी मक्सी कुजूर, जगदलपुर के सीई एलेक्जेंडर ग्राहम, एसई नरेन्द्र कुमार पाण्डेय, ईई वेद प्रकाश पाण्डेय तथा रायपुर के सीई सुमन कुमार मिंज, एसई संतोष साहू और ईई ललित राउते की भूमिका पर उंगली उठी है।
कमरो ने तीनों टेंडर तुरंत निरस्त करने, फर्जी जानकारी देने वाली फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने और 14 अफसरों को सस्पेंड कर उच्च स्तरीय जांच बैठाने की मांग की है। शिकायत की कॉपी प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव, ईओडब्ल्यू और एंटी करप्शन ब्यूरो को भेज दी गई है।