
छत्तीसगढ़ बहुचर्चित शराब घोटाले में दो साल की गहन जांच के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने 29,800 पन्नों की अंतिम चार्जशीट पेश कर दी है, जिसमें कुल 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है.
रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में अपनी दो साल की जांच पूरी करके कोर्ट में फाइनल चार्जशीट जमा कर दी है. लगभग 29,800 पन्नों की यह बड़ी चार्जशीट सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय समय सीमा के अंदर दायर की गई है. इस मामले में ED ने इस घोटाले को व्यक्तिगत भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि एक "संगठित अपराध" बताया है, जिसमें सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल करके सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया. चार्जशीट में 2,800 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है.
ED ने पेश की 29,800 पन्नों की फाइनल चार्जशीट**
ईडी की 29,800 पन्नों की फाइनल चार्जशीट के मुताबिक, पूरा घोटाला एक सिंडिकेट के इर्द-गिर्द घूम रहा था, जिसमें बिजनेसमैन अनवर ढेबर, रिटायर्ड IAS ऑफिसर अनिल टुटेजा, ITS ऑफिसर अरुणपति त्रिपाठी और पूर्व मुख्यमंत्री की डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया ने अहम भूमिका निभाई थी. जांच एजेंसी का आरोप है कि इस सिंडिकेट ने शराब घोटाले के लिए राज्य के 15 अहम जिलों की पहचान की थी. भ्रष्टाचार की इस योजना को आसानी से चलाने के लिए अधिकारियों की नियुक्तियां और पोस्टिंग भी सिंडिकेट की मर्जी के मुताबिक की गई थीं. अब सबूतों और गवाहों की गवाही के आधार पर ट्रायल शुरू होगा.
2800 करोड़ रु.का घोटाला
चार्जशीट में कुल 81 लोगों के नाम हैं, जिनमें 22 गिरफ्तार अधिकारी, बिजनेसमैन और नेता शामिल हैं जिन्हें आरोपी बनाया गया है. उन पर ₹2,800 करोड़ के घोटाले का आरोप है. पर्याप्त सबूतों और गवाहों की गवाही के आधार पर ED का दावा है कि एक्साइज डिपार्टमेंट के अंदर अवैध रूप से पैसे वसूलने के लिए एक पैरेलल सिस्टम बनाया गया था. इस फाइनल चार्जशीट के दाखिल होने के साथ ही अब आरोपियों के खिलाफ कानूनी ट्रायल शुरू होगा. ED का आरोप है कि यह संगठित अपराध का मामला था.
उधर, ईडी के मुताबिक इस घोटाले में करीब 2800 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के सबूत मिले हैं, जबकि ईओडब्ल्यू इसे लगभग 3000 करोड़ रुपये का घोटाला मान रही है. दोनों एजेंसियों के आकलन के अनुसार घोटाले की कुल राशि बढ़कर 3500 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है.