
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का आज पांचवां और अंतिम दिन है। सत्र के समापन दिवस पर सदन में राजनीतिक तापमान चरम पर रहने की संभावना है। प्रश्नकाल, शासकीय एवं अशासकीय कार्यों के साथ-साथ दिन का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा रहेगा। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबी और तीखी बहस देखने को मिल सकती है, जो देर रात तक चलने की संभावना है।
प्रश्नकाल से होगी कार्यवाही की शुरुआत
दिन की शुरुआत प्रश्नकाल से होगी, जिसमें महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और खाद्य मंत्री दयालदास बघेल विभिन्न विभागों से जुड़े सदस्यों के सवालों के जवाब देंगे। इसके बाद सदन में शासकीय और अशासकीय कार्यों पर चर्चा होगी।
वित्त मंत्री रखेंगे CAG की रिपोर्ट
कार्यसूची के अनुसार, वित्त मंत्री ओपी चौधरी स्थानीय निकायों से संबंधित भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखेंगे। इसके अलावा विधायक गोमती साय, धर्मजीत सिंह और भैयालाल राजवाड़े विभिन्न समितियों एवं विषयों से जुड़े प्रतिवेदन सदन में प्रस्तुत करेंगे।
अविश्वास प्रस्ताव पर होगी सबसे अहम बहस
सत्र के अंतिम दिन की सबसे महत्वपूर्ण कार्यवाही विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर अपनी बात रखेंगे। इसके बाद कांग्रेस के विधायक सरकार के कामकाज, कानून-व्यवस्था, किसानों, युवाओं, बेरोजगारी, प्रशासनिक व्यवस्था और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास करेंगे। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मंत्रिमंडल के सदस्य विपक्ष के आरोपों का जवाब देंगे तथा सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को सदन के सामने रखेंगे।
दूसरे दिन पेश हुआ था प्रस्ताव
गौरतलब है कि कांग्रेस ने मानसून सत्र के दूसरे दिन राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रस्ताव स्वीकार करते हुए 17 जुलाई को इस पर चर्चा कराने की घोषणा की थी। इसके बाद से ही अंतिम दिन की कार्यवाही को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है।
दसवीं बार आया अविश्वास प्रस्ताव
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद विधानसभा में यह दसवां अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले विभिन्न सरकारों के खिलाफ लाए गए नौ अविश्वास प्रस्ताव सदन में बहुमत के अभाव में पारित नहीं हो सके थे। इस बार भी सरकार के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह चर्चा बेहद महत्वपूर्ण होगी क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष को जनता के सामने रखने का प्रयास करेंगे। सत्र के अंतिम दिन सदन की कार्यवाही पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी, क्योंकि अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली बहस आगामी राजनीतिक रणनीतियों और सरकार-विपक्ष के रुख की दिशा भी तय कर सकती है।