नोएडा। साइबर ठग अब बैंकिंग और टैक्स से जुड़ी सामान्य जरूरतों को भी ठगी का हथियार बना रहे हैं। नोएडा में ऐसे ही दो मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। एक मामले में क्रेडिट कार्ड बनवाने के बहाने APK फाइल भेजकर लाखों रुपये साफ कर दिए गए, जबकि दूसरे मामले में Form 16 की जानकारी तलाश रहे सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी को निशाना बनाया गया। दोनों मामलों में पीड़ितों के खातों से कुल करीब 17 लाख रुपये ट्रांसफर होने की शिकायत सामने आई है।

क्रेडिट कार्ड के नाम पर बनाया शिकार
सेक्टर-61 निवासी कपड़ा कारोबारी राजेश के पास 18 मई 2025 को एक व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक कर्मचारी बताते हुए घर बैठे क्रेडिट कार्ड बनवाने का ऑफर दिया। ठग ने आवेदन प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर राजेश को एक APK फाइल डाउनलोड करने के लिए भेजी। पीड़ित ने उसके बताए तरीके से फाइल इंस्टॉल कर दी और जरूरी जानकारी भर दी। इसके बाद उसे बताया गया कि आवेदन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है और जल्द ही क्रेडिट कार्ड मिल जाएगा। लेकिन अगले ही दिन राजेश के बैंक खाते से करीब 8 लाख रुपये निकल गए। खाते से रकम गायब होने का पता चलते ही उन्होंने मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी।

Form 16 की जानकारी खोजी, ठगों ने फोन कर दिया
दूसरा मामला सेक्टर-107 का है। यहां रहने वाले सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी हेमंत ने Google पर Form 16 से जुड़ी जानकारी तलाश की थी। बताया गया कि इसके बाद 3 जुलाई को उनके पास एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने कथित तौर पर Form 16 उपलब्ध कराने और प्रक्रिया पूरी कराने की बात कही। इसी दौरान उन्हें एक APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा गया। जैसे ही पीड़ित ने फाइल डाउनलोड की, साइबर ठगों ने कथित तौर पर उनके बैंक खाते से करीब 9 लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए। बैंक खाते से बड़ी रकम निकलने का पता चलने के बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।

दो घटनाओं में 17 लाख की चपत
दोनों पीड़ितों ने शुक्रवार को साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामलों की जांच शुरू कर दी है और बैंक खातों में हुए ट्रांजेक्शन, कॉल डिटेल तथा रकम भेजे जाने वाले खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।

APK फाइल बन रही साइबर ठगों का नया हथियार
इन घटनाओं ने एक बार फिर मोबाइल में अनजान APK फाइल डाउनलोड करने के खतरे को सामने ला दिया है। साइबर अपराधी अक्सर बैंक कर्मचारी, टैक्स अधिकारी, कस्टमर केयर एजेंट या किसी सरकारी विभाग का प्रतिनिधि बनकर लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद किसी सेवा, आवेदन, KYC या दस्तावेज के नाम पर मोबाइल में संदिग्ध एप्लिकेशन इंस्टॉल कराने की कोशिश की जाती है। ऐसी फाइल मोबाइल में इंस्टॉल होने के बाद ठगों को संवेदनशील जानकारी या डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच हासिल करने का मौका मिल सकता है।

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। बैंक, इनकम टैक्स या किसी सरकारी सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए हमेशा संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत हेल्पलाइन का इस्तेमाल करें। एक छोटी सी लापरवाही बैंक खाते की पूरी जमा पूंजी पर भारी पड़ सकती है। नोएडा के इन दोनों मामलों में लाखों रुपये की ठगी इसी बात की चेतावनी दे रही है।