नई दिल्ली। कंबोडिया, म्यांमार और दुबई में बैठे साइबर ठगों की कॉल आपके मोबाइल स्क्रीन पर भारतीय नंबर (+91) से कैसे चमकती है? इस बड़े खेल की पड़ताल में टेलीकॉम नेटवर्क के दुरुपयोग का एक नया तरीका खुला है। ठग अब गांवों और दूरदराज के इलाकों में बंद पड़े टेलीकॉम टावरों (घोस्ट टावर्स) में सेंध लगा रहे हैं। इन टावरों के आसपास अवैध सिम बॉक्स या जीएसएम गेटवे सेट करके विदेशी इंटरनेट कॉल को लोकल कॉल में बदला जा रहा है। इसके बाद इसी नंबर से 'डिजिटल अरेस्ट' और फर्जी निवेश का जाल फैलाकर लोगों से साइबर ठगी हो रही है।

दूरसंचार मंत्रालय से मिले इनपुट के बाद सीबीआई ने बीते एक महीने में ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। नोएडा, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, बेंगलुरु के अलावा बिहार के सुपौल, वैशाली (महुआ) और ओडिशा के जगतसिंहपुर में छापेमारी की गई। जांच के दौरान एक डिस्ट्रीब्यूटर भी दबोचा गया है। इस पर आरोप है कि उसने सीधे-साधे ग्रामीणों की ई-केवाईसी करवाकर 1,300 से ज्यादा सिम एक्टिवेट कराईं। फिर इन्हीं सिमों को अवैध सिम बॉक्स में डालकर साइबर ठगी के कॉल घुमाए गए।

अवैध सिम बॉक्स से ऐसे बदलता है पूरा खेल

साइबर अपराधी वीरान या बंद पड़े टावरों के पास बिजली और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का सीधा इस्तेमाल कर अवैध सिम बॉक्स जोड़ देते हैं। विदेश से आने वाली इंटरनेट कॉल इंटरनेशनल गेटवे से गुजरने के बजाय सीधे इस सिम बॉक्स तक पहुंचती है। यहां से बाहर निकलते ही यह कॉल (+91) वाले भारतीय नंबर में बदल जाती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे का कहना है कि बिना देखरेख वाले यह टावर अब 'ब्लाइंड स्पॉट' बन रहे हैं। इन पर नजर रखकर ही अवैध सिम बॉक्स नेटवर्क को रंगे हाथ पकड़ा जा सकता है।

अब निष्क्रिय टावरों की होगी जियो टैगिंग

सामने आए इस बड़े खुलासे के बाद दूरसंचार विभाग ने अपनी निगरानी काफी कड़ी कर दी है। सुरक्षा विंग के सीनियर अफसर ने बताया कि बंद और निष्क्रिय टावरों की डिजिटल मैपिंग और जियो-टैगिंग का काम शुरू हो चुका है। अगर इसमें टावर कंपनियों या ऑपरेटरों की ढिलाई सामने आई, तो 50 लाख से 5 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना और सख्त आपराधिक कार्रवाई तय है।

आपके काम की बात

अगर आपको किसी बंद टावर के आसपास कोई संदिग्ध हलचल दिखे या आपके मोबाइल का नेटवर्क 4G/5G से अचानक गिरकर 2G पर आ जाए, तो तुरंत अलर्ट हो जाएं। इसकी शिकायत फौरन संचार साथी पोर्टल पर दर्ज कराएं या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।