बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सूरजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है । कोर्ट के बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद जवाब पेश नहीं करने और निर्धारित तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होने को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने सीईओ से पूछा है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए ।

मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ में हुई । यह प्रकरण आरती दुबे मिश्रा बनाम छत्तीसगढ़ शासन से जुड़ा है । कोर्ट के मुताबिक, इस मामले में लंबे समय से आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है ।

दरअसल, 30 नवंबर 2022 को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने जिला पंचायत सूरजपुर के सीईओ को नोटिस जारी कर जवाब देने का निर्देश दिया था । इसके बावजूद अगली कार्यवाही के दौरान सीईओ की ओर से कोई प्रतिनिधि कोर्ट में मौजूद नहीं हुआ । 28 अप्रैल 2026 की सुनवाई में भी राज्य सरकार के अधिवक्ता को सीईओ से आवश्यक निर्देश लेने के लिए कहा गया, लेकिन इसके बाद भी कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ ।

मामले को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को सीईओ को फिर नोटिस जारी किया और 5 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया । लेकिन तय तारीख पर सीईओ न तो कोर्ट पहुंचे और न ही उनकी तरफ से कोई जवाब दाखिल किया गया । इस रवैये पर हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि एक लोक अधिकारी द्वारा न्यायालय के आदेशों से लगातार बचने का प्रयास किया जाना गंभीर विषय है । कोर्ट ने सीईओ को अब यह बताने के लिए नोटिस जारी किया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए ।

प्रमुख सचिव से भी मांगा जवाब

हाई कोर्ट ने मामले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव को भी जवाबदेह बनाया है । कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को आदेश की जानकारी सीईओ के साथ प्रमुख सचिव तक पहुंचाने का निर्देश दिया है । साथ ही प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने कहा गया है कि अदालत के आदेशों के पालन में लगातार हो रही देरी की स्थिति क्यों बनी हुई है । कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि इस तरह के मामलों में अधिकारियों द्वारा न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी की शिकायतें पहले भी उसके संज्ञान में आती रही हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई होती नजर नहीं आई । इसी वजह से इस बार विभाग के प्रमुख सचिव से भी व्यक्तिगत तौर पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है ।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को होगी । इस तारीख पर हाई कोर्ट सीईओ के खिलाफ जारी नोटिस और प्रमुख सचिव के शपथपत्र समेत मामले में हुई कार्रवाई की समीक्षा करेगा ।