हाईकोर्ट का दखल: निलंबित आईपीएस डांगी मामले में गृह सचिव समेत अन्य को नोटिस, आईएएस अफसरों से जांच कराने की मांग


बिलासपुर। निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ लगाए गए उत्पीड़न और अश्लील हरकतों के मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है। मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने राज्य के गृह सचिव सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है और उनसे इस पूरे प्रकरण में जवाब तलब किया है। यह कानूनी कार्रवाई पीड़िता द्वारा अदालत में दायर की गई याचिका के आधार पर की गई है। अपनी याचिका के माध्यम से पीड़िता ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पूरे केस को आईएएस अधिकारियों के सुपुर्द करने का आग्रह न्यायालय से किया है।


क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप


राजकिशोर नगर की रहने वाली एक महिला योग टीचर ने आईपीएस रतनलाल डांगी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन योगा क्लास के दौरान आईपीएस अधिकारी ने उनके साथ अश्लील बातचीत की। पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी बताया है कि अधिकारी ने वीडियो कॉल पर नग्न होकर भी हरकतें कीं।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, जब उसने इन हरकतों का विरोध किया और बात मानने से इनकार किया, तो उसे डराया-धमकाया गया। पीड़िता के पति पुलिस विभाग में ही सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। महिला का कहना है कि आईपीएस डांगी ने उनके पति को किसी झूठे पुलिस प्रकरण में फंसाने की धमकी दी। इसके अतिरिक्त, उनके पति का तबादला घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में करवाने की धमकी देकर दबाव बनाने का प्रयास किया गया।


सबूतों के साथ शिकायत और निलंबन की कार्रवाई


इन धमकियों और उत्पीड़न से परेशान होकर पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समक्ष अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने अपनी शिकायत के साथ सभी जरूरी डिजिटल सबूत भी पुलिस मुख्यालय को सौंपे थे। इस शिकायत के आधार पर विभाग ने कार्रवाई करते हुए मार्च महीने में रतनलाल डांगी को उनके पद से निलंबित कर दिया था।


जांच अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप


निलंबन की विभागीय कार्रवाई के बाद, मामले की विस्तृत जांच के लिए डीजीपी ने तत्कालीन आईजीपी आनंद छाबड़ा और तत्कालीन डीआईजीपी मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी के रूप में नियुक्त किया था। लेकिन अब इसी पुलिसिया जांच प्रक्रिया पर पीड़िता ने आपत्ति जताई है।
महिला ने हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में उल्लेख किया है कि वर्तमान में नियुक्त दोनों जांच अधिकारी आरोपी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। पीड़िता के अनुसार, पुलिस अधिकारियों द्वारा की जा रही जांच निष्पक्ष दिशा में नहीं जा रही है। इसी कारण से उन्होंने उच्च न्यायालय से अपील की है कि इस मामले की जांच पुलिस अधिकारियों से हटाकर आईएएस अधिकारियों के माध्यम से कराई जाए। उच्च न्यायालय ने अब इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए गृह सचिव व अन्य से जवाब मांगा है। आगे की सुनवाई शासन का जवाब आने के बाद तय होगी