
बिलासपुर।शासन के राजस्व को चूना लगाने और चहेते ठेकेदारों पर मेहरबानी का एक बड़ा मामला सामने आया है। मामला हाई कोर्ट में फैसिलिटी मैनेजमेंट (सफाई) के ठेके से जुड़ा है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अफसरों ने नियमों को दरकिनार करते हुए पिछले तीन वर्षों से नया टेंडर ही जारी नहीं किया है। मामले में ताज़ा मेहरबानी यह है कि भुगतान के लिए आए एक करोड़ रुपए की पूरी राशि बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के उसी पुराने ठेकेदार को जारी कर दी गई है।
दिखावे का टेंडर और एक्सटेंशन का खेल
हाई कोर्ट में सफाई का ठेका पीडब्ल्यूडी के माध्यम से होता है। नियमों के अनुसार, टेंडर की अवधि समाप्त होने के तत्काल बाद नया टेंडर जारी हो जाना चाहिए था। लेकिन, वर्तमान टेंडर मार्च 2023 में ही समाप्त होने के बावजूद, कार्य का संचालन ठेकेदार सतीश कुमार सिंह ही कर रहे हैं। अफसरों ने टेंडर बुलाने का सिर्फ दिखावा किया। 4 जुलाई 2023, 29 सितंबर 2023 और 16 फरवरी 2024 को टेंडर लगाए तो गए, लेकिन उन्हें जानबूझकर कभी ओपन नहीं किया गया। पिछले दो साल से तो नया टेंडर लगाने का कोई प्रयास ही नहीं हुआ है।
ईई और सब इंजीनियर संदेह के घेरे में
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, फाइल को जानबूझकर इसलिए लटकाया गया ताकि ठेकेदार का वर्तमान एक्सटेंशन खत्म होने से ठीक पहले प्रक्रिया शुरू की जा सके। इससे ठेकेदार टेंडर में शामिल भी हो जाएगा और टेंडर 'प्रोग्रेस' में होने का हवाला देकर उसे अगला एक्सटेंशन भी थमा दिया जाएगा। इस पूरे सुनियोजित खेल में डिवीजन-2 के कार्यपालन अभियंता (EE) और संबंधित सब इंजीनियर की भूमिका पूरी तरह संदेहास्पद है। टेंडर में मनमानी शर्ते हटाने के ईएनसी के स्पष्ट निर्देश के बाद भी, ईई ने नया टेंडर जारी करने के लिए फाइल उच्च अधिकारियों को अब तक नहीं भेजी है।
अधिकतम दर पर कृपा, शासन को भारी नुकसान
ठेकेदार पर यह विशेष कृपा खजाने पर भारी पड़ रही है। यह टेंडर 1.462 फीसदी की अधिकतम दर पर स्वीकृत किया गया है। इसमें हर साल खर्च होने वाली राशि में 10% वृद्धि का प्रावधान है, जिससे पिछले पांच वर्षों में कुल बढ़ोतरी लगभग 50 फीसदी तक हो चुकी है। आरोप है कि टेंडर में जानबूझकर ऐसी विशेष शर्तें जोड़ी गईं ताकि कोई अन्य फर्म प्रतिस्पर्धा में आ ही न सके। यदि समय पर पारदर्शी टेंडर होता, तो काम न्यूनतम दर पर आता और शासन के राजस्व की भारी बचत होती।
अफसरों के बुलावे पर एसई ने की अवहेलना
पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता ने इस संबंध में एसई केपी. संत को रायपुर तलब किया था। ईएनसी कार्यालय से जारी पत्र (क्रमांक 2803/48098/प्र.अ./नि.प्र./25-26) में स्पष्ट उल्लेख था कि संशोधित बिड डॉक्यूमेंट के अनुमोदन और स्पष्ट अभिमत के साथ 01.11.2025 को उपस्थित हों, लेकिन उन्होंने उच्चाधिकारियों के निर्देशों की खुली अवहेलना की और वे नहीं पहुंचे।
इनका क्या कहना है:
मुझे फिलहाल इस मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है। प्रकरण संज्ञान में आया है, इसकी जांच कराई जाएगी।"
मुकेश बंसल, सचिव, लोक निर्माण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन