सोलन। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही तेज बारिश ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोलन जिले के कसौली क्षेत्र में बारिश के साथ हुए भूस्खलन से कालका-शिमला रेलमार्ग प्रभावित हो गया, जबकि चंडीगढ़-शिमला नेशनल हाईवे पर भी पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण यातायात बाधित हुआ। आज दोपहर बाद करीब ढाई बजे बारिश तेज होने के बाद कई स्थानों पर हालात बिगड़ने लगे। कालका-शिमला रेलखंड पर कोटी और गुम्मन स्टेशन के बीच पटरी पर पत्थर और मलबा आ गया, जिसके बाद ट्रेन संचालन को रोकना पड़ा।

पटरी पर मलबा, कोटी स्टेशन के पास रोकी ट्रेन
भूस्खलन के बाद शिमला से कालका की ओर जा रही ट्रेन नंबर 52458 को कोटी स्टेशन के पास रोक दिया गया। रेलमार्ग पर मलबा हटाने और ट्रैक को दोबारा सुरक्षित बनाने के लिए रेलवे कर्मचारियों की टीम मौके पर जुट गई है। प्राथमिकता पटरी से मलबा हटाने के साथ यह सुनिश्चित करना है कि ट्रैक पर दोबारा ट्रेनों की आवाजाही सुरक्षित तरीके से शुरू की जा सके।

हाईवे पर भी पहाड़ से लगातार गिर रहा मलबा
बारिश का असर सिर्फ रेलमार्ग तक सीमित नहीं रहा। चंडीगढ़-शिमला नेशनल हाईवे-05 पर भी भूस्खलन के कारण यातायात प्रभावित हुआ है। जाबली से परवाणू के बीच चक्की मोड़ के भूस्खलन क्षेत्र में पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा आने की सूचना है। खतरे को देखते हुए एक लेन को बंद कर दिया गया है और दूसरी लेन से वाहनों को नियंत्रित तरीके से निकाला जा रहा है।

चक्की मोड़ पर पहले भी बिगड़े थे हालात
चक्की मोड़ क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा नया नहीं है। सोमवार शाम भी यहां पहाड़ी से मलबा आने के बाद कुछ समय के लिए दोनों लेन पर वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी थी। बारिश जारी रहने के कारण इस हिस्से में दोबारा भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। ऐसे में हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतना जरूरी हो गया है।

कांगड़ा में भी बारिश ने बढ़ाई परेशानी
उधर, कांगड़ा जिले में दोपहर बाद तेज बारिश हुई। धौलाधार की पहाड़ियों से सटे पालमपुर और धर्मशाला क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण कई सड़कों पर पानी बहने लगा। बारिश के बाद नदी-नालों का जलस्तर भी बढ़ गया और कुछ इलाकों में जलभराव की स्थिति देखने को मिली।

पहाड़ों में मौसम ने बढ़ाई चुनौती
हिमाचल में बारिश के दौरान भूस्खलन और अचानक मलबा गिरने की घटनाएं पहाड़ी सड़कों और रेलमार्ग के लिए बड़ी चुनौती बन जाती हैं। खासकर उन स्थानों पर खतरा ज्यादा रहता है, जहां पहले भी भूस्खलन हो चुका है। फिलहाल, सोलन में रेलवे ट्रैक और हाईवे दोनों को सुरक्षित बनाने का काम जारी है। बारिश के बीच सबसे बड़ी चुनौती यही है कि पहाड़ी से गिर रहे मलबे को नियंत्रित करने के साथ यातायात को सुरक्षित रखा जाए।