कोरबा/रायपुर।कॉरपोरेट की चालाकी और खाकी की शर्मनाक मिलीभगत का  सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। कोरबा की नामी कंपनी 'हिंद एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन (इंडिया) लिमिटेड ने अपने ही एक अशिक्षित  चपरासी को कागजों में डायरेक्टर बनाकर करोड़ों की बेनामी संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग का खेल खेला। जब पाप का घड़ा भरा और पीड़ित ने मामले की जानकारी सार्वजनिक की,  जिसके बाद पुलिस विभाग के अधिकारी  भक्षक बन गए और पुलिस कंपनी के बाउंसर की तरह काम करने लगे। लेकिन 2 साल तक फाइलें दबाए बैठे सिस्टम को अब पसीना आ रहा है, क्योंकि मामले सीधे राष्ट्रपति भवन की एंट्री हो गई है।

चपरासी को बनाया अरबपति डायरेक्टर

62 वर्षीय आदिवासी कांति कुमार प्रधान 2006 से हिंद एनर्जी में बतौर चपरासी कार्यरत थे। आरोप है कि कंपनी के डायरेक्टर - संजय अग्रवाल, पवन कुमार अग्रवाल, सतीश कुमार अग्रवाल, राजीव अग्रवाल समेत 12 निदेशकों—ने इस अनपढ़ बुजुर्ग की मजबूरी का सीधा फायदा उठाया। बिना उसे बताए, धोखे से कागजों पर उसे कंपनी का निदेशक बना दिया गया। इसके बाद उसके नाम का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपयों की बेनामी संपत्तियां खरीदी गईं। 

पुलिस ने दिखाई दादागिरी, ROC ने मूंदी आंखें

वर्ष 2020 में जब यह पूरा फर्जीवाड़ा आयकर विभाग की नजर में आया, तब  प्रधान को अपने नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े का पता चला। उसने पुलिस की शरण ली, लेकिन यहां सिस्टम' पहले ही रसूखदारों के आगे नतमस्तक था। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी हरीशचंद्र टंडेकर और ASI मनोज मिश्रा ने एसपी के आदेश होने का झूठा खौफ दिखाकर बिना वारंट उस बुजुर्ग को जबरन उठाने और जान से मारने की कोशिश की। परिजनों के कड़े विरोध के चलते किसी तरह उसकी जान बची।
दूसरी ओर, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) छत्तीसगढ़ की भूमिका इस मामले में सबसे ज्यादा संदिग्ध है। पीड़ित ने 2 साल पहले मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी लेन-देन और फर्जी नियुक्ति के सारे पुख्ता सबूत ROC को सौंपे। कई बार ई-मेल और रजिस्टर्ड डाक भेजे, लेकिन अफसरों ने कंपनी के पहुंच के सामने के आगे अपनी आंखें मूंद लीं। और कोई भी नोटिस जारी नहीं हुआ।

राष्ट्रपति के दखल से बड़ी हलचल, मुख्य सचिव को कार्यवाई के  निर्देश

सिस्टम से हारकर इस बुजुर्ग ने 22 मई 2026 को सीधे राष्ट्रपति, मानवाधिकार आयोग (NHRC), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिसके बाद 27 मई को ही राष्ट्रपति सचिवालय ने  
सख्ती बरतते हुए मामला सीधे छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को  कार्यवाही' के लिए अग्रेषित कर दिया है। साथ ही सख्त निर्देश दिए हैं कि की गई कार्रवाई की सूचना सीधे प्रार्थी को दी जाए।

प्रार्थी ने की CBI जांच की मांग

मामले में प्रार्थी कांति कुमार प्रधान ने 
 पूरे मामले की जांच CBI या SFIO से करवाने की मांग की है अपने ज्ञापन पत्र में उसने 
  धोखाधड़ी करने वाले 12 निदेशकों और मामले में दोषी तत्कालीन पुलिसकर्मियों को तुरंत गिरफ्तार करने और 
 CRPF से सुरक्षा  और कंपनी के बैंक खाते सीज करने की मांग की है l साथ ही 
  2 साल तक फाइल दबाकर बैठने वाले ROC छत्तीसगढ़ पर विभागीय करने आग्रह किया है।