Jagdalpur News: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर केंद्रीय जेल में शुक्रवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। जहां आमतौर पर जेल की ऊंची दीवारों के बीच सन्नाटा पसरा रहता है, वहीं इस बार शहनाई की गूंज और वैवाहिक मंत्रों की आवाज सुनाई दी। न्यायालय की विशेष अनुमति के बाद दुष्कर्म के मामले में विचाराधीन बंदी सुरेश सेठिया ने अपनी प्रेमिका के साथ जेल परिसर में विधि-विधान और सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार सात फेरे लिए। समारोह में दोनों परिवारों के सीमित सदस्य, अधिवक्ता, समाजसेवी और जेल प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

कोर्ट की अनुमति और परिवारों की सहमति से हुई शादी
जेल प्रशासन के अनुसार, विवाह का आयोजन न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों और दोनों परिवारों की सहमति के बाद किया गया। सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेल परिसर में मंडप, पूजन और विवाह की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। पूरे कार्यक्रम का संचालन जेल नियमों और कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया गया।

15 साल बाद फिर गूंजी जेल में शहनाई
केंद्रीय जेल प्रशासन ने बताया कि इससे पहले करीब 15 वर्ष पूर्व भी न्यायालय की अनुमति से जेल परिसर में एक विवाह कराया गया था। इसके बाद यह पहला मौका है जब किसी विचाराधीन बंदी का विवाह जेल के भीतर संपन्न हुआ। इस वजह से यह आयोजन प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बना रहा।

दुष्कर्म मामले में जेल में बंद है आरोपी
सुरेश सेठिया पिछले करीब सात महीने से दुष्कर्म के मामले में न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल में बंद है। आरोप है कि उसकी प्रेमिका के परिजनों ने बोधघाट थाने में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है और उस पर अंतिम फैसला आना बाकी है।

जेल मुलाकात से शुरू हुई शादी की पहल
जेल में बंद रहने के दौरान युवती नियमित रूप से सुरेश से मिलने आती रही। इसी दौरान दोनों ने विवाह करने की इच्छा जताई। इसके बाद आरोपी ने जेल प्रशासन को आवेदन दिया और अधिवक्ताओं के माध्यम से न्यायालय में हलफनामा प्रस्तुत किया। दोनों के बालिग होने और आपसी सहमति को देखते हुए न्यायालय ने विवाह की अनुमति प्रदान की। इसके बाद विवाह की पूरी प्रक्रिया जेल परिसर में संपन्न कराई गई।

जेल अधीक्षक ने क्या कहा?
केंद्रीय जेल अधीक्षक अक्षय तिवारी ने बताया कि न्यायालय की अनुमति और दोनों परिवारों की सहमति मिलने के बाद मानवोचित एवं विधिसम्मत दृष्टिकोण अपनाते हुए विवाह की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं। पंडित की मौजूदगी में धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न कराया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवाह की अनुमति मिलने से विचाराधीन आपराधिक मामला प्रभावित नहीं होगा और उसकी सुनवाई न्यायालय में पहले की तरह जारी रहेगी।