
जगदलपुर। पढ़ाई के लिए शिक्षक नहीं, भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल और शिकायतों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं, बस्तर के जगदलपुर में शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधित विद्यालय के विद्यार्थियों की परेशानी अब सड़क तक पहुंच गई है। आड़ावाल स्थित इस विद्यालय के दिव्यांग छात्र अपनी मांगों को लेकर आड़ावाल बायपास रोड पर चटाई बिछाकर बैठ गए। बच्चों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हुई और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
बायपास रोड पर चटाई बिछाकर बैठे विद्यार्थी
शिक्षकों की कमी और अन्य समस्याओं से परेशान विद्यार्थियों ने सड़क पर बैठकर अपना विरोध जताया। बच्चों की मांग है कि विद्यालय में जल्द शिक्षकों की व्यवस्था की जाए, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद समाज कल्याण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और विद्यार्थियों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। यह प्रदर्शन केवल शिक्षकों की उपलब्धता का सवाल नहीं है, बल्कि विशेष जरूरतों वाले विद्यार्थियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पर भी ध्यान खींचता है।
पांच व्याख्याताओं को हटाने के बाद बढ़ी परेशानी
विद्यार्थियों का आरोप है कि पिछले साल शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालय में पांच व्याख्याताओं की व्यवस्था की गई थी। लेकिन 4 मई को इन व्याख्याताओं को हटा दिया गया। छात्रों के मुताबिक, इसके बाद से अब तक शिक्षकों की नई व्यवस्था नहीं हो सकी है। शिक्षकों की कमी के कारण अलग-अलग विषयों की पढ़ाई में परेशानी आने की बात कही जा रही है। विद्यार्थियों की मांग है कि संबंधित विभाग जल्द से जल्द व्याख्याताओं की व्यवस्था करे, ताकि उनकी पढ़ाई नियमित रूप से जारी रह सके।
भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायत
विद्यार्थियों ने विद्यालय में दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें घटिया गुणवत्ता का खाना दिया जाता है। इस तरह शिक्षकों की कमी के साथ भोजन की समस्या भी उनकी नाराजगी की वजह बनी हुई है। हालांकि, भोजन की गुणवत्ता से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभाग का इस पर विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। मामले में भोजन व्यवस्था की जांच और विद्यार्थियों की शिकायतों पर कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
अगस्त में भी कलेक्ट्रेट पहुंचे थे बच्चे
जानकारी के अनुसार, विद्यार्थी इससे पहले अगस्त महीने में भी अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उस समय उन्हें आश्वासन मिलने के बाद वे लौट गए थे। लेकिन विद्यार्थियों का कहना है कि इसके बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। अब दोबारा प्रदर्शन किए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि पहले की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और शिक्षकों की व्यवस्था अब तक क्यों नहीं हो सकी। यदि समस्याएं पहले ही दूर कर दी गई होतीं, तो क्या विद्यार्थियों को फिर सड़क पर बैठकर अपनी मांगें उठानी पड़तीं?
समाज कल्याण विभाग ने स्वीकार की शिक्षकों की कमी
पूरे मामले पर समाज कल्याण विभाग की अधिकारी सुचित्रा लकड़ा ने बताया कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी है और इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया जा रहा है। अब विद्यार्थियों की निगाहें विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। जरूरत इस बात की है कि शिक्षकों की उपलब्धता, भोजन की गुणवत्ता और पहले दिए गए आश्वासनों की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी सामने आए। दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा यह मामला प्रशासन के लिए एक अहम जिम्मेदारी की याद दिलाता है। अब देखना होगा कि बातचीत और आश्वासन के बाद समस्याओं का ठोस समाधान निकलता है या विद्यार्थियों को अपनी मांगों के लिए फिर आवाज उठानी पड़ेगी।