नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के J&K गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने मेस में कथित तौर पर खराब गुणवत्ता का खाना मिलने और हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है। छात्राओं ने विश्वविद्यालय के सेंटेनरी गेट पर धरना देकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना है कि मेस से जुड़ी समस्याओं को लेकर वे लंबे समय से शिकायत करती आ रही हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। छात्राओं ने मौजूदा मेस वेंडर का ठेका समाप्त करने, मेस में महिला कर्मचारियों की नियुक्ति, संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और आंदोलन में शामिल छात्राओं पर किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने की मांग उठाई है।

लंबे समय से मेस की व्यवस्था को लेकर नाराजगी
प्रदर्शनकारी छात्राओं का आरोप है कि मेस में भोजन की गुणवत्ता को लेकर कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने शिकायत रखी गई। उनका कहना है कि समस्याओं के समाधान का भरोसा मिलने के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। छात्राओं ने यह भी दावा किया कि इसी तरह की शिकायतों को लेकर वर्ष 2023 में भी विरोध प्रदर्शन हुआ था। उनके मुताबिक, उस समय भी मेस वेंडर को हटाने की मांग उठाई गई थी, लेकिन कथित तौर पर ठेकेदार को नहीं बदला गया।

चार प्रमुख मांगों को लेकर धरना
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने चार प्रमुख मांगें विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखीं। इनमें मौजूदा ठेकेदार को हटाना, मेस में पुरुष कर्मचारियों की जगह महिला कर्मचारियों की नियुक्ति, डिप्टी प्रॉक्टर निखत से इस्तीफे की मांग और प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के खिलाफ किसी तरह की प्रशासनिक कार्रवाई नहीं करने की मांग शामिल है। छात्राओं की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि मेस से जुड़ी शिकायतों के दौरान उन्हें प्रशासनिक स्तर पर दबाव और धमकी का सामना करना पड़ा। हालांकि, इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।

AISA ने लगाया समझौते के बाद वादे से पीछे हटने का आरोप
मामले को लेकर AISA के सचिव सौरभ ने दावा किया कि छात्राओं के प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय के DSW, प्रोवोस्ट, डिप्टी प्रॉक्टर और अन्य अधिकारियों ने छात्राओं के साथ बातचीत की थी। उनके मुताबिक, बातचीत के दौरान छात्राओं की चारों मांगों पर सहमति बनी और दस्तावेज पर हस्ताक्षर भी किए गए। सौरभ का आरोप है कि प्रशासन की ओर से मेस ठेकेदार को बदलने पर सहमति जताई गई थी। लेकिन बाद में छात्राओं को पता चला कि कथित तौर पर सिर्फ ठेकेदार का नाम बदला गया और वही व्यक्ति दोबारा मेस का काम संभाल रहा है। इसी तरह कर्मचारियों को लेकर भी छात्राओं ने अपनी मांग पूरी नहीं होने का आरोप लगाया है।

खाने को लेकर भी छात्राओं की शिकायत
प्रदर्शनकारी छात्राओं ने आरोप लगाया कि विवाद के बीच उन्हें सुबह का नाश्ता और दोपहर का भोजन उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका कहना है कि शाम के समय प्रोवोस्ट की ओर से छात्रों को बुलाकर केबिन से भोजन लेने की बात कही गई। छात्राओं का आरोप है कि इस दौरान भी उनके साथ कथित तौर पर धमकी भरा व्यवहार किया गया। इन्हीं शिकायतों के विरोध में उन्होंने दोबारा सेंटेनरी गेट पर धरना शुरू कर दिया।

अब प्रशासन के जवाब पर टिकी नजर
छात्राओं और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच विवाद चार मांगों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। छात्राएं चाहती हैं कि जिन मुद्दों पर सहमति बनी थी, उन्हें स्पष्ट रूप से लागू किया जाए। वहीं, मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ठेका, कर्मचारियों और छात्राओं की शिकायतों को लेकर प्रशासन का वास्तविक रुख क्या है। छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों और कथित समझौते से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।