जांजगीर-चांपा जिले के बहुचर्चित करही गोलीकांड का पुलिस ने पूरी तरह से पर्दाफाश कर दिया है। ऑपरेशन हंट के तहत पुलिस ने इस खूनी खेल के मास्टरमाइंड और मुख्य आरोपी गनपत बघेल को गिरफ्तार कर लिया है। उसके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई एक 9mm पिस्टल और मैगजीन भी बरामद हुई है। इस हत्याकांड के पीछे की जो इनसाइड स्टोरी निकलकर सामने आई है, वह किसी क्राइम-थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है।

यह कहानी सिर्फ एक आम हत्या की नहीं है, बल्कि रेत के काले कारोबार में वर्चस्व की जंग, उधारी के पैसों के विवाद और एक उभरते हुए युवा व्यवसायी की तरक्की से जलती ईर्ष्या की है।

रेत का खेल, भारी ईएमआई 

कहानी की असल शुरुआत होती है रेत के अवैध कारोबार से। मुख्य आरोपी गनपत बघेल (38 वर्ष) ने अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए भारी-भरकम लोन पर हाइवा और जेसीबी मशीन खरीदी थी। इन मशीनों की मोटी मासिक किस्त (EMI) चुकाने के लिए वह अवैध रेत परिवहन के धंधे में उतर गया।

यहीं से उसकी सीधी टक्कर मृतक आयुष कश्यप से शुरू हुई। आयुष भी रेत परिवहन और बिक्री के इसी खेल का हिस्सा था, लेकिन उसका तरीका ज्यादा आक्रामक था। वह कम कीमत में रेत बेचकर गनपत के पक्के ग्राहकों को अपनी ओर खींच रहा था। गनपत का आरोप था कि आयुष रेत घाट पर जबरन लोडिंग करता था और 'दादागिरी' दिखाता था। इतना ही नहीं, आयुष ने राजस्व विभाग की टीम बुलाकर गनपत के वाहनों को पकड़वाने की धमकी भी दी थी।

ग्राहकों के टूटने और किश्तें न चुका पाने के भारी आर्थिक तनाव ने गनपत को मानसिक रूप से परेशान कर दिया। आयुष की तेजी से बढ़ती आर्थिक तरक्की और उसका बढ़ता प्रभाव गनपत की आंखों में इस कदर चुभने लगा कि उसके मन में गहरी आत्मग्लानि और दुश्मनी पैदा हो गई।

उधारी का विवाद में गहराई साजिश की नींव

रेत के कारोबार के अलावा पर्दे के पीछे एक और विवाद सुलग रहा था। पुलिस की गिरफ्त में आए एक अन्य आरोपी भूषण बघेल के भाई द्वारा लिए गए उधार के पैसों को लेकर मृतक आयुष के परिवार से लगातार झगड़ा चल रहा था।

व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा, आर्थिक नुकसान और उधारी के विवाद ने मिलकर एक ऐसा बारूद तैयार किया, जिसे फटने के लिए सिर्फ एक चिंगारी की जरूरत थी। गनपत ने अपने साथियों— अमित टंडन, भूषण बघेल और हेमंत बघेल के साथ मिलकर आयुष को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली।

23-24 अप्रैल की वो काली रात... ऐसे दिया वारदात को अंजाम

मुख्य साजिशकर्ता गनपत बघेल के इशारे पर 23-24 अप्रैल 2026 की दरम्यानी रात को चुना गया। खूनी खेल को अंजाम देने का तरीका बेहद सुनियोजित था:

 वारदात से पहले ही आरोपी घर के आसपास घात लगाए बैठे थे। घर में घुसने से पहले सहयोगियों द्वारा सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए गए, ताकि उनकी पहचान छिपी रहे। तीन नकाबपोश बदमाश दबे पांव घर में घुसे और सबसे पहले मृतक के पिता के कमरे को बाहर से लॉक कर दिया, ताकि वो मदद के लिए बाहर न आ सकें। इसके बाद आरोपी सीधे आयुष कश्यप के कमरे में दाखिल हुए और उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। गोलियों की आवाज सुनकर जब आयुष का छोटा भाई बीच-बचाव करने आया, तो आरोपियों ने उसे भी गोली मार दी और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

पुलिस का ऑपरेशन हंट 

इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम, डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। यह एक ब्लाइंड मर्डर था, जिसे सुलझाने के लिए पुलिस ने 200 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले।

साइबर टीम दिन-रात एक कर तकनीकी साक्ष्य जुटाती रही। इस मामले के खुलासे में Techint (टेक्निकल इंटेलिजेंस) और Humint (ह्यूमन इंटेलिजेंस) ने ब्रह्मास्त्र का काम किया। पुलिस ने पहले ही तीन आरोपियों— हेमंत कुमार बघेल, भूषण बघेल और अमित टंडन (सभी निवासी करही) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया था।लेकिन मास्टरमाइंड गनपत बघेल पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। आखिरकार, पुलिस को मुखबिर से पक्की सूचना मिली और ऑपरेशन हंट के तहत उसे धर दबोचा गया।