
छतरपुर : केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आदिवासी महिलाओं ने नदी में उतरकर गले में फांसी का फंदा डाल 'फांसी सत्याग्रह' शुरू कर दिया हैं l मध्यप्रदेश में 44,605 करोड़ रुपये की केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के विरोध में आदिवासी महिलाओं ने शुक्रवार को गले में फांसी का फंदा डालकर सांकेतिक ‘फांसी सत्याग्रह' शुरू कर दिया है. प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि यदि उनका समुचित पुनर्वास नहीं किया जा सकता, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए l
मामला छतरपुर जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर कूपी गांव का हैं l कूपी गाँव के पास बराना नदी के किनारे यह आंदोलन जारी हैं , इससे पहले विस्थापित परिवार अपनी मांगों को लेकर ‘चिता सत्याग्रह' और ‘जल सत्याग्रह' भी कर चुके हैं l प्रभावितों का आरोप है कि उन्हें अवैध रूप से बेदखल किया गया, जिससे उनकी आजीविका छिन गई है , साथ ही परियोजना प्रभावितों की सूची तैयार करने में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं l
अप्रैल में दिया आश्वासन , अब तक पूरा नहीं
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर पिछले पांच दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं l प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने अप्रैल महीने में जो आश्वासन दिए थे, उन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है l भटनागर ने दावा किया कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के साथ-साथ मझगांव और रुनझ सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित लोगों को अब तक न्याय नहीं मिला है l विस्थापित परिवार अपनी जमीन, जंगल, जल स्रोत, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान खो चुके हैं l
प्रशासन पर ग्रामीणों को धमकाने का आरोप
भटनागर ने आरोप लगाया और कहा कि कई ग्रामीणों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए l उन्हें अवैध रूप से बेदखल किया गया साथ ही उनके बिजली कनेक्शन तक काट दिए गए l भटनागर ने प्रशासन के उस दावे को भी खारिज कर दिया , जिसमें कहा गया था कि पहले सूची से बाहर रहे 638 परिवारों को अब शामिल कर लिया गया है l उनका कहना है कि मैनारी गांव के 114 लोगों के नाम अब भी सूची से बाहर हैं l प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि प्रशासन ग्रामीणों को डराना-धमकाना बंद करे l प्रशासन प्रभावित परिवारों की सूची गांवों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करे l विस्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी किए बिना बांध का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सकता l
प्रारशासन का आरोप, राहत एवं पुनर्वास पैकेज में वृद्धि के बाद भी और मुआवजे की मांग
छतरपुर के कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने बताया कि अधिकारियों की प्रदर्शनकारियों से लगातार बातचीत जारी है, ताकि उनकी समस्याओं को समझकर उनका समाधान किया जा सके l हालांकि, जिला प्रशासन का कहना है कि अप्रैल में आंदोलन के दौरान उठाई गई मांगों को पूरा कर दिया गया है l प्रदर्शनकारी पड़ोसी पन्ना जिले के निवासी हैं और दोनों जिलों के अधिकारी उनसे संपर्क में हैं l उन्होंने बताया मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने राहत एवं पुनर्वास पैकेज में वृद्धि की है, लेकिन अब प्रदर्शनकारी इससे भी अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं l गौरतलब है कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से पन्ना जिले के आदिवासी भी बड़ी संख्या में प्रभावित हुए हैं l
ये हैं केन-बेतवा लिंक परियोजना