Jashpur News: जशपुर जिला अस्पताल से कथित रिश्वतखोरी का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग से लेकर प्रशासन तक हलचल बढ़ गई है। मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के नाम पर एक डॉक्टर द्वारा कथित तौर पर पैसे लेने का आरोप लगाया गया है। मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिकायत प्रशासन तक पहुंची, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई है। वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम और डॉक्टर पर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट के नाम पर पैसे लेने का आरोप
जानकारी के मुताबिक, जिला अस्पताल में मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचे एक व्यक्ति से कथित तौर पर पैसे लिए जाने का आरोप है। इसी घटनाक्रम से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो सामने आने के बाद मामले को लेकर सवाल उठने लगे कि क्या मेडिकल प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई थी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी।

वायरल वीडियो के आधार पर CM हेल्पलाइन में शिकायत
मामले को लेकर सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता ने वायरल वीडियो और घटनाक्रम का हवाला देते हुए पूरे मामले की जांच कराने तथा दोष साबित होने पर उचित कार्रवाई की मांग की है। शिकायत प्रशासन तक पहुंचने के बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी।

डिप्टी कलेक्टर हरिओम द्विवेदी को सौंपी गई जांच
प्रशासन ने मामले की जांच की जिम्मेदारी डिप्टी कलेक्टर हरिओम द्विवेदी को सौंपी है। जांच अधिकारी वायरल वीडियो के साथ शिकायत में लगाए गए आरोपों और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रहे हैं। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि वीडियो में दिखाई दे रहा घटनाक्रम किस परिस्थिति में हुआ और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य महकमे में चर्चा
जिला अस्पताल से जुड़ा मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है। सरकारी अस्पतालों में मेडिकल प्रमाण पत्र जैसी सेवाओं को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो जांच के बाद स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।

जांच के बाद ही सामने आएगा सच
प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। वायरल वीडियो अपने आप में आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है। प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट के नाम पर वास्तव में पैसे लिए गए थे या वायरल वीडियो और शिकायत के पीछे कोई दूसरा घटनाक्रम था।

सवालों के घेरे में व्यवस्था, जवाब जांच से मिलेगा
जशपुर जिला अस्पताल से सामने आए इस मामले ने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब जांच यह तय करेगी कि मामला रिश्वतखोरी का है या आरोपों के पीछे कोई अलग तथ्य छिपा है।