Kawardha News: कवर्धा जिले के तरेगांव थाना क्षेत्र स्थित पीएमश्री एकलव्य आवासीय विद्यालय के छात्रावास में जूनियर छात्र के साथ मारपीट का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। आरोप है कि कुछ सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्र को कमरे में बंद कर उसके साथ मारपीट की। घटना के बाद छात्र के कान, आंख और पीठ पर चोट के निशान बताए जा रहे हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद छात्र के परिजन नाराज हैं। उन्होंने घटना को लेकर तरेगांव थाने में शिकायत दर्ज कराई है और पूरे मामले की जांच के साथ दोषी छात्रों पर कार्रवाई की मांग की है।

कमरे में बंद किया, फिर मारपीट का आरोप
परिजनों की शिकायत के मुताबिक, छात्रावास में रहने वाले कुछ सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्र को कथित तौर पर कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद उसके साथ मारपीट की गई। घटना के बाद छात्र के शरीर पर चोट के निशान दिखाई देने की बात सामने आई है। परिजनों के अनुसार, उसके कान, आंख और पीठ पर चोट लगी है। इस घटना के बाद छात्रावास में बच्चों की सुरक्षा और आपसी निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।जूनियर छात्र के साथ मारपीट

400 से ज्यादा आदिवासी बच्चे करते हैं पढ़ाई
पीएमश्री एकलव्य आवासीय विद्यालय में करीब 400 बच्चे अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। यहां कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाती है। छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थी आदिवासी समुदाय से आते हैं, जिनमें बैगा जनजाति के बच्चे भी शामिल हैं। ऐसे में छात्रावास के भीतर बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखना प्रबंधन की बड़ी जिम्मेदारी है। मारपीट की घटना सामने आने के बाद अभिभावक यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर छात्रावास में बच्चों की निगरानी किस तरह की जा रही है।

अधीक्षक की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल 
घटना के बाद परिजनों ने छात्रावास प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बच्चों की पर्याप्त निगरानी नहीं होने के कारण सीनियर और जूनियर छात्रों के बीच विवाद या मारपीट की स्थिति बन रही है। परिजनों का कहना है कि यदि छात्रावास में नियमित निगरानी और प्रभावी अनुशासन व्यवस्था होती तो बच्चे को कमरे में बंद कर कथित तौर पर मारपीट करने की स्थिति पैदा नहीं होती। हालांकि, अधीक्षक की ओर से इस मामले में क्या पक्ष सामने आया है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

परिजनों का दावा- पहले भी हो चुकी है मारपीट
परिजनों का आरोप है कि छात्रावास में मारपीट की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी बच्चों के साथ मारपीट की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। लगातार इस तरह की शिकायतों के बाद अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों को सुरक्षित और भयमुक्त माहौल मिलना चाहिए, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।जूनियर छात्र के साथ मारपीट

पुलिस शिकायत के बाद अब जांच पर नजर
घटना के बाद पीड़ित छात्र के परिजनों ने तरेगांव थाने में शिकायत दी है। अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ और मारपीट के आरोप कितने सही हैं। परिजनों ने दोषी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ छात्रावास की व्यवस्था की भी जांच कराने की मांग की है। वहीं, शिक्षा विभाग और छात्रावास प्रबंधन की ओर से मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर भी अभिभावकों की नजर है।

सवाल सिर्फ मारपीट का नहीं, बच्चों की सुरक्षा का भी
एकलव्य आवासीय विद्यालय जैसे संस्थानों में बड़ी संख्या में बच्चे घर से दूर रहकर पढ़ाई करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, अनुशासन और मानसिक रूप से सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है। कवर्धा के इस मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है, अगर छात्रावास में ही बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो जिम्मेदारी तय करने और ऐसी घटनाओं को रोकने की व्यवस्था आखिर कितनी मजबूत है?