बिलासपुर: जीएसटी बकाया वसूली से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत प्रदान करते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मामला मां काली इंडस्ट्रीज द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा है, जिसमें राज्य कर विभाग की ओर से जारी वसूली आदेशों और अटैचमेंट नोटिस को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों को आधार मानते हुए करदाता को सशर्त राहत दी है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क रखा गया कि जब तक जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन नहीं हो जाता, तब तक करदाताओं को अपील का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके समर्थन में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी सर्कुलर और अधिसूचनाओं का हवाला दिया गया, जिनमें अपील की समय-सीमा बढ़ाने और प्री-डिपॉजिट के आधार पर राहत देने का प्रावधान शामिल है। कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि मौजूदा दिशा-निर्देशों के तहत ही समाधान संभव है।

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता निर्धारित समय सीमा के भीतर प्री-डिपॉजिट राशि जमा कर संबंधित प्राधिकरण को अंडरटेकिंग देता है, तो शेष जीएसटी बकाया की वसूली पर फिलहाल रोक लगाई जाएगी। इस फैसले को करदाताओं के लिए राहत भरा माना जा रहा है, खासकर उन मामलों में जहां अपीलेट ट्रिब्यूनल के अभाव में कानूनी विकल्प सीमित थे।