जशपुर। जिले के मनोरा विकासखंड की अलोरी ग्राम पंचायत में इब नदी पर पुलिया का निर्माण अधूरा होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मतलूँगा और अलोरी गांव के बीच आवाजाही के लिए लोगों को अब जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने ट्रक की पुरानी ट्यूब और बांस की मदद से एक अस्थायी नाव तैयार की है, जिसके सहारे रोजाना नदी पार की जा रही है।

पुल नहीं बना तो ग्रामीणों ने खुद निकाला रास्ता
मतलूँगा-अलोरी मार्ग पर इब नदी ग्रामीणों की आवाजाही में बड़ी बाधा बनी हुई है। नदी पर पुलिया का निर्माण लंबे समय से पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में ग्रामीणों ने अपनी जरूरत के लिए ट्यूब और बांस से अस्थायी नाव तैयार कर ली। बताया जा रहा है कि इस नाव में एक साथ करीब पांच लोग बैठकर नदी पार करते हैं। नाव को नदी के दोनों किनारों पर बांधी गई रस्सियों से नियंत्रित किया जाता है। ग्रामीण रस्सी को खींचते हुए नाव को एक किनारे से दूसरे किनारे तक ले जाते हैं।

बारिश में बढ़ जाता है खतरा
बरसात के मौसम में इब नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ बहाव भी तेज हो जाता है। ऐसे में ट्यूब और बांस से बनी नाव से नदी पार करना बेहद जोखिम भरा हो जाता है। नाव का संतुलन बिगड़ने या रस्सी के टूटने की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की आवाजाही को लेकर है। इसके बावजूद रोजमर्रा के काम, बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी कार्यों के लिए ग्रामीणों को नदी पार करनी पड़ती है।

अधूरी पुलिया बनी परेशानी की वजह
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इब नदी पर पुलिया का निर्माण पूरा हो जाए तो मतलूँगा, अलोरी और आसपास के गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल अधूरे निर्माण के कारण लोगों को वैकल्पिक और जोखिम भरे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से निर्माणाधीन पुलिया का काम जल्द पूरा कराने की मांग की है, ताकि बरसात के दौरान नदी पार करने की मजबूरी खत्म हो और लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

ग्रामीणों का सवाल,आखिर कब बनेगा पुल?
इब नदी पर पुलिया का इंतजार अब ग्रामीणों के लिए परेशानी और जोखिम दोनों बन चुका है। ट्यूब-बांस की अस्थायी नाव फिलहाल उनकी मजबूरी का सहारा है, लेकिन सवाल यही है कि आखिर कब तक ग्रामीणों को इसी तरह जान हथेली पर रखकर नदी पार करनी पड़ेगी?