रायपुर। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बीच प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। एमसीबी जिले के खड़गवां विकासखंड में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच के बाद निराधार बताया है। विभाग का दावा है कि कार्यक्रम का संचालन शासन के तय नियमों, वित्तीय प्रावधानों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया गया है।

विभागीय जांच के अनुसार 184 जोड़ों के सामूहिक विवाह कार्यक्रम में प्रति हितग्राही निर्धारित 50 हजार रुपये की सहायता राशि का उपयोग नियमानुसार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से सीधे राशि हस्तांतरित की गई है, जबकि विवाह आयोजन, भोजन व्यवस्था और आवश्यक वैवाहिक सामग्री पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार खर्च किया गया है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि गुणवत्ता संबंधी शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर संबंधित फर्म के भुगतान में कटौती की गई है, जिससे हितग्राहियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

मामले पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रदेश सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर काम कर रही है। किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेकर उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाती है। सरकार का कहना है कि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है और योजना का संचालन निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया है। ऐसे में अब इस पूरे मामले पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।