
बिलासपुर/बोकारो। कोल इंडिया (Coal India) में कर्मचारियों को मिलने वाली यूनिफॉर्म योजना अब एक बड़े फर्जीवाड़े का अखाड़ा बन गई है। खदानों की गहराई में पसीना बहाने वाले मजदूरों के नाम पर कागजों में 'डिजाइनर ड्रेस' सिलने का बड़ा खेल उजागर हुआ है। हालात ये हैं कि ड्रेस की 'फिटिंग' से ज्यादा फोकस फर्जी बिलों की 'बिलिंग' पर रहा। इस महाघोटाले की भनक लगते ही कोल इंडिया प्रबंधन ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। मुख्यालय ने एक कड़ा सर्कुलर जारी कर झारखंड से लेकर एसईसीएल (SECL) के हर एरिया में हड़कंप मचा दिया है। अब घोटालेबाजों की नींद उड़ी हुई है।
फर्जी GST बिल और अदृश्य यूनिफॉर्म का 'फैशन शो
आपको जानकर हैरानी होगी कि कई जगहों पर कपड़े की वास्तविक सप्लाई ही नहीं हुई, लेकिन धड़ल्ले से बिल पास हो गए। इसे 'अदृश्य यूनिफॉर्म' का खेल कहा जा रहा है। कर्मचारियों को हर साल यूनिफॉर्म के लिए एक तय राशि दी जाती है। नियम यह है कि निर्धारित गुणवत्ता और मात्रा में कपड़े खरीदे जाएं। लेकिन वेंडरों और कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से पुराने बिलों का दोबारा इस्तेमाल किया गया। हद तो तब हो गई जब बेहद घटिया क्वालिटी के कपड़ों के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड के बराबर के इनवॉइस लगा दिए गए। व्यंग्य यह है कि यूनिफॉर्म के कपड़े से ज्यादा मजबूत तो उसके फर्जी बिल निकले।
SECL के कई एरिया रडार पर, खुल रही घोटाले की सिलाई
इस खेल की आंच केवल एक-दो खदानों तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, एसईसीएल के कई एरिया में भी इस यूनिफॉर्म फर्जीवाड़े की अंदरखाने सुगबुगाहट तेज हो गई है। कर्मचारियों के बीच कानाफूसी चल रही है कि हर साल यूनिफॉर्म का बजट तो लगातार बढ़ रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर पारदर्शिता और गुणवत्ता रसातल में जा रही है। अगर निष्पक्षता से फाइलें खंगाली जाएं तो कई एरिया से 'यूनिफॉर्म से ज्यादा यूनिफॉर्म के बिल' बाहर आएंगे। कोल इंडिया की सख्ती के बाद से उन विभागों में भारी बेचैनी है, जो अब तक खदान के बजाय फाइलों में 'सिलाई-कढ़ाई' का काम कर रहे थे।
ऑडिट की कैंची से कटेगा फर्जीवाड़ा, गिरेगी गाज
फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने के लिए कोल इंडिया ने अपनी तलवार म्यान से निकाल ली है। जारी सर्कुलर में साफ चेतावनी दी गई है कि कंपनी और उसकी अनुषांगिक इकाइयां अब यूनिफॉर्म का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करेंगी। इसके साथ ही जीएसटी पोर्टल से बिलों का क्रॉस-वेरिफिकेशन और कड़ा रिकॉर्ड ऑडिट भी होगा। बिना वास्तविक बिक्री के इनवॉइस जारी करने वाले वेंडरों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। फर्जीवाड़ा करने वाले कर्मचारियों पर बिना पूर्व सूचना के कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।