मैहर: मैहर जिले में खसरे के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। एक बार फिर बच्चों में तेजी से फैल रहे संक्रमण ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अजमाइन गांव में छह बच्चों के संक्रमित मिलने और एक मासूम की मौत के बाद इलाके में भय का माहौल है। जिस बीमारी को टीकाकरण के जरिए नियंत्रित करने का दावा किया जाता है, उसके दोबारा फैलने से कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं।

गांव में बच्चों को बुखार, शरीर पर दाने, सर्दी-जुकाम, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण दिखाई देने के बाद जांच कराई गई, जिसमें कई बच्चों में खसरे की पुष्टि हुई है। सबसे दर्दनाक मामला तीन वर्षीय बच्चे की मौत का है, जिसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और समय पर उपचार की उपलब्धता को लेकर बहस छेड़ दी है।

स्वास्थ्य विभाग संक्रमण की चेन तोड़ने और नए मामलों की पहचान के लिए अभियान चला रहा है, लेकिन सवाल यह है कि यदि क्षेत्र में पहले से खसरे के मामले सामने आ रहे थे, तो रोकथाम के उपाय कितने प्रभावी साबित हुए। लगातार नए संक्रमित मिलने से यह आशंका भी बढ़ गई है कि संक्रमण का दायरा अभी और बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और संभावित स्रोतों की जांच की जा रही है। लेकिन एक मासूम की मौत और लगातार बढ़ते मामलों ने यह साफ कर दिया है कि संक्रामक बीमारियों को लेकर जरा सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन संक्रमण पर कितनी जल्दी काबू पाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।