
रायपुर। देश के चर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा घोटाले की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत में एक साथ छह नए आरोप पत्र (चार्जशीट) पेश किए हैं। इन चार्जशीट में मुख्य सरगना सहित कुल 72 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सट्टे का कारोबार चलाने के लिए अफसरों को प्रोटेक्शन मनी दी जा रही थी। इसके अलावा फर्जी खातों के जरिए सट्टे की रकम विदेश भेजी गई। लेकिन, इस पूरे खुलासे के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जांच में जिन पुलिस अफसरों को प्रोटेक्शन मनी देने की बात कही गई है, उनके नाम इस चार्जशीट में कहीं नहीं हैं।
डेढ़ साल की जांच, फिर भी अफसर महफूज
महादेव सट्टा एप मामले में पूर्व में ईडी और ईओडब्ल्यू ने भी कार्रवाई की थी। उस समय कई राजनेताओं और राज्य के बड़े पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आए थे। इसी वजह से मामले की पूरी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने 18 दिसंबर 2024 को 21 लोगों पर गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच शुरू की थी। इस दौरान सीबीआई ने राज्य के कई पुलिस अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। इन छापों में आईजी, डीआईजी, एसपी, एएसपी और टीआई स्तर के अधिकारी शामिल थे। पूछताछ के लिए इन अधिकारियों को रायपुर पुलिस लाइन के ऑफिसर मेस और दिल्ली तक बुलाया गया था। करीब डेढ़ साल की लंबी जांच के बाद अब सीबीआई ने कोर्ट में चार्जशीट पेश की है, लेकिन इसमें एक भी बड़े अधिकारी का नाम शामिल नहीं है। जांच एजेंसी ने उन्हीं लोगों को आरोपी बनाया है, जिन पर अन्य एजेंसियां पहले ही कार्रवाई कर चुकी हैं। इससे सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
6 प्रमुख आरोपी और ट्रेवल एजेंसी का खेल
सीबीआई ने एक आरोप पत्र भ्रष्टाचार के मामले में दायर किया है, जिसमें छह मुख्य आरोपियों का उल्लेख है। इनमें असीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापरिया, अनिल धम्मानी और भोपाल के विशाल आहूजा तथा धीरज आहूजा शामिल हैं। विशाल और धीरज ट्रैवल एजेंसी चलाते हैं। इन दोनों पर महादेव ऐप के प्रमोटरों, उनके परिवार और सहयोगियों के लिए हवाई टिकट बुक करने का आरोप है। इन्होंने मुख्य टिकट प्रदाताओं के पास वॉलेट बैलेंस जमा किया और उसी का उपयोग घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय टिकटों की बुकिंग के लिए किया। इन आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के साथ भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
66 अन्य लोगों पर सट्टा नेटवर्क चलाने का आरोप
सट्टेबाजी नेटवर्क के मामले में 66 अन्य लोगों के खिलाफ पांच और आरोप पत्र पेश किए गए हैं। इनमें सट्टेबाजी सिंडिकेट पैनल के कई सदस्य शामिल हैं। इन लोगों ने अवैध सट्टेबाजी से मिली अपराध की कमाई को ठिकाने लगाने और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) में बड़ी भूमिका निभाई। सिंडिकेट ने अलग-अलग राज्यों में सट्टेबाजी पैनल स्थापित किए और डिजिटल विज्ञापनों के माध्यम से देश भर में लाखों लोगों को अपना शिकार बनाया। इन पांचों आरोप पत्रों को भारतीय दंड संहिता तथा छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत अदालत में पेश किया गया है।
प्रमोटरों को भारत लाने की कोशिश तेज
सीबीआई ने मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ भी कुछ अतिरिक्त साक्ष्य अदालत के सामने प्रस्तुत किए हैं। जांच के मुताबिक, महादेव ऐप के प्रमोटर और उनके कई सहयोगी भारत छोड़कर पश्चिम एशियाई देशों में रह रहे हैं और वहीं से पूरा नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। इंटरपोल इनके खिलाफ पहले ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर चुका है। इन्हें भारत लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद ली जा रही है और भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, ताकि देश में मौजूद इनकी संपत्तियां जब्त की जा सकें।