रायपुर। एक तरफ महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े नारे हैं और दूसरी तरफ राजनांदगांव जिले का सोमनी थाना है। विडंबना देखिए, जिले की कमान एक तेज-तर्रार महिला एसपी के हाथों में है, लेकिन इसी जिले में 14 साल की एक बीमार नाबालिग के साथ सिस्टम ने जो सुलूक किया, वह न सिर्फ खौफनाक है बल्कि हमारे खोखले सिस्टम पर एक करारा तमाचा भी है।

यह कहानी शुरू होती है स्वास्थ्य विभाग के अति-ज्ञानी स्टाफ से और खत्म होती है खाकी की अति-सक्रियता पर।

पेट दर्द का इलाज कराने गए, प्रेग्नेंसी का तमगा दे दिया

पूरी घटना सोमनी थाना क्षेत्र की है। 14 साल की एक नाबालिग बच्ची को मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं के कारण तेज पेट दर्द था। घबराए हुए परिजन 25 मई को उसे सोमनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले गए। यहां के स्टाफ ने अपनी मेडिकल नॉलेज का ऐसा 'शानदार' प्रदर्शन किया कि बिना पुख्ता जांच के ही इस बीमार बच्ची को सीधे 'गर्भवती' घोषित कर दिया। परिजनों के तो मानो पैरों तले जमीन ही खिसक गई। लेकिन असली खेल तो इसके बाद शुरू हुआ।

आधी रात को पुलिस का टॉर्चर और शर्मनाक सवाल

स्वास्थ्य केंद्र ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पुलिस को सूचना दे दी। अब हमारी पुलिस, जो असल अपराधियों को पकड़ने में भले ही कभी-कभी पसीना छोड़ दे, उसने एक बीमार बच्ची पर अपना पूरा 'सिंघम' रूप दिखा डाला। सोमनी पुलिस ने रात 10 बजे बच्ची को उसके रिश्तेदार के घर से उठा लिया।

रात 10 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक थाने में बिठाकर बच्ची से 'थर्ड डिग्री' पूछताछ हुई। एक महिला कांस्टेबल ने ही महिला संवेदनाओं की धज्जियां उड़ाते हुए बच्ची का गला दबाया, मारपीट की और जमकर गालियां दीं। इस दौरान उस 14 साल की बच्ची से लगातार एक ही सवाल पूछा जाता रहा

बता, तूने किसके साथ..........

सुबह रिपोर्ट निगेटिव आई, तो सिस्टम का उतरा बुखार पुलिस रातभर एक बेगुनाह और बीमार बच्ची को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ती रही। अगले दिन जब सच्चाई जांचने के लिए दोबारा टेस्ट कराया गया, तो रिपोर्ट 'निगेटिव' आई। यानी बच्ची गर्भवती थी ही नहीं! वाह रे हमारा सिस्टम! आपकी एक चूक ने 14 साल की बच्ची के गले पर सूजन के निशान दे दिए और मन में जिंदगी भर का खौफ। सदमे में डूबी बच्ची ने पिछले दो दिनों से अन्न का एक दाना तक नहीं खाया है।

दबाव बढ़ा तो शुरू हुआ एक्शन का रूटीन ड्रामा

जब मामला तूल पकड़ने लगा और परिजनों ने कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर कलेक्टर और एसपी कार्यालय में शिकायत की, तब जाकर प्रशासन की नींद टूटी। सीएमएचओ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सोमनी CHC की मेडिकल ऑफिसर डॉ. मौन्या साहू को हटाकर बसंतपुर स्थित मातृ-शिशु अस्पताल भेज दिया है (शायद वहां वे बेहतर डायग्नोसिस कर सकें!)।इधर, एसपी अंकिता शर्मा ने भी प्रथम दृष्टया लापरवाही मानते हुए सोमनी थाना प्रभारी अरुण नामदेव को लाइन अटैच कर दिया है और तुमड़ीबोड़ के प्रभारी दिलीप पटेल को सोमनी भेज दिया गया है।