रायपुर। नवा रायपुर अटल नगर स्थित शिवनाथ भवन के जल संसाधन विभाग में इन दिनों पदस्थापना और संविदा नियुक्ति का मामला गरमाया हुआ है। विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय में पदस्थ अधीक्षण अभियंता (प्रशा.) श्री प्रसुन्न कुमार शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग को लेकर विस्तृत जांच की मांग सामने आई है। पिछले तीन-चार माह से जल संसाधन विभाग में 18 वरिष्ठ इंजीनियरों को अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नत किया जा चुका है। पदोन्नति उपरांत उनकी पदस्थापना होनी थी, परंतु पद के अभाव का हवाला देकर शासन द्वारा इसे अनावश्यक रूप से रोक कर रखा गया है। इसके पीछे मुख्य वजह विभाग में पहले से संविदा पर जमे अधिकारी को बताया जा रहा है।

गरिमा के विरुद्ध निचले पद पर संविदा

विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री शर्मा पूर्व में मुख्य अभियंता के पद पर पदोन्नत हो चुके हैं। वर्तमान में वे मुख्य अभियंता के पद से ही सेवानिवृत्ति का पूरा लाभ ले रहे हैं। इसके बावजूद, जल संसाधन विभाग में अधीक्षण अभियंता के पद पर संविदा नियुक्ति लेकर पिछले 06 वर्षों से अधिक अवधि से अधीक्षण अभियंता (प्रशा.) के पद पर पदस्थ हैं। अब इस स्थिति पर गौर किया जा सकता है कि मुख्य अभियंता रैंक का अफसर अपनी गरिमा के विरुद्ध निचले पद पर क्यों चिपका हुआ है, जबकि 18 पदोन्नत अधीक्षण अभियंता अपनी पदस्थापना के लिए लगातार प्रतीक्षारत हैं।

महत्वपूर्ण प्रकोष्ठों पर नियंत्रण और पकड़

श्री शर्मा द्वारा प्रमुख अभियंता कार्यालय में अपनी मजबूत प्रशासनिक पकड़ बना रखी गई है। इसके साथ ही, प्रमुख अभियंता कार्यालय के निविदा प्रकोष्ठ एवं बजट प्रकोष्ठ का संपूर्ण कार्य भी उन्होंने अपने नियंत्रण में रखा हुआ है। टेंडर और बजट जैसे महत्वपूर्ण काम निचले पद पर काबिज संविदा अधिकारी के पास होने से कई तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। 

संपत्ति को लेकर भी हुआ खुलासा

विभागीय शिकायत में इनकी संपत्तियों का भी उल्लेख किया जा रहा है। कहना तो नहीं चाहिए, परंतु यहां उल्लेख करना भी जरूरी हो जाता है कि इनके मूल निवास के लिए डी.डी. नगर में आलीशान बंगला मौजूद है। इसके अतिरिक्त, रायपुर के सुन्दर नगर में भी आलीशान भवन बना हुआ है। साथ ही, अविनाश बिल्डर्स द्वारा बनाए गए कॉम्प्लेक्स में भी भवन मौजूद है। इस प्रकार, करीब-करीब 30-40 करोड़ की संपत्ति के आसामी होने की बात सामने आई है। 

विभाग की छबि हो रही है धूमिल

करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद, पैसों की भूख इस हद तक है कि गरिमामय पद से सेवानिवृत्ति उपरांत भी निचले पद पर दूसरों का हक छीन कर संविदा नियुक्ति पर कार्य किया जा रहा है। इन तमाम परिस्थितियों के कारण जल संसाधन विभाग की छबि काफी धूमिल हो रही है और यह पूरा प्रकरण विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। आशा की जा रही है कि विभाग की स्वच्छ प्रशासनिक छबि को बनाए रखने के लिए इन उल्लेखित तथ्यों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर उचित कार्यवाही शीघ्र की जाएगी।