स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक अधिकांश लोग लगातार मोबाइल स्क्रीन के संपर्क में रहते हैं। लेकिन स्क्रीन पर लंबे समय तक नजरें टिकाए रखना आंखों की सेहत पर गंभीर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ता स्क्रीन टाइम ड्राई आई सिंड्रोम (Dry Eye Syndrome) के मामलों में तेजी से इजाफा कर रहा है। यह समस्या केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में भी तेजी से देखने को मिल रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि आंखों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आंसुओं की एक प्राकृतिक परत जरूरी होती है, जो उन्हें नमी और सुरक्षा प्रदान करती है। सामान्य परिस्थितियों में इंसान एक मिनट में लगभग 15 से 20 बार पलकें झपकाता है, लेकिन मोबाइल या लैपटॉप पर लगातार काम करते समय यह संख्या घटकर 5 से 7 बार तक रह जाती है। कम पलक झपकाने की वजह से आंखों की नमी तेजी से कम होने लगती है, जिससे आंखों में जलन, चुभन, सूखापन, लालिमा, भारीपन और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

विशेषज्ञ स्क्रीन से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं। इसके तहत हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड का ब्रेक लेकर कम से कम 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखना चाहिए। इसके अलावा स्क्रीन इस्तेमाल करते समय बार-बार पलकें झपकाने की आदत विकसित करनी चाहिए। रात में अंधेरे कमरे में मोबाइल चलाने से बचना भी जरूरी है, क्योंकि इस दौरान स्क्रीन की तेज रोशनी आंखों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। यदि आंखों में लगातार जलन, सूखापन या देखने में परेशानी महसूस हो रही हो तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।